शहर के पूरब से होकर बहने वाली सोत नदी के दोनों फाटों पर कई नेताओं और असरदार लोगों ने कब्जा करके अवैध निर्माण कर लिया है। कई बार अवैध कब्जे हटवाने की मांग उठी। प्रशासन ने भी सोत को अतिक्रमण मुक्त कराने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन मुहिम आगेे नहीं बढ़ सकी। इसकी एक वजह यह भी है कि अवैध कब्जा कर व्यावसायिक निर्माण कराने वालो में कई असरदार लोगों के साथ नेता भी शामिल हैं। सदा नीरा कही जाने वाली सोत नदी के फाटों पर लालपुल के पास अवैध कब्जे कर निर्माण कराने का दौर करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। सत्तारूढ़ पार्टियों से जुड़े लोग कब्जा कर अवैध निर्माण कराते गए। विरोध भी हुआ, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। शहर में सोत नदी के दोनों फाटों पर होटल, मैरिज लॉन और वर्कशॉप बन चुके हैं। जिस सोत नदी की चौड़ाई लालपुल के पास करीब 50 मीटर हुआ करती थी, अब वह घटकर पांच मीटर से भी कम रह गई है। 13 अगस्त 2016 को तत्कालीन डीएम पवन कुमार के आदेश पर सोत नदी की जमीन पर एक नेता के व्यावसायिक निर्माण को रुकवा दिया गया था। इसके बाद लोगों को लगा कि शायद अब सोत नदी अतिक्रमण मुक्त हो जाए, लेकिन मुहिम थमी रह गई। सोत नदी के फाटों की राजस्व विभाग ने कई बार नपत कराई। नेताओं के बीच जब शीत युद्ध हुआ तो प्रशासन ने सितंबर 2015 में एक नेता के अवैध निर्माण को ध्वस्त भी कराया। बाद में यहां फिर से निर्माण कर लिया गया।