वज़ीरगंज में राम कथा का पाठ करते स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज। संवाद
वजीरगंज। वार्ष्णेय धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में सोमवार को स्वामी रामचंद्राचार्य ने श्रीराम केवट प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जिन श्रीराम रूपी परब्रह्म परमात्मा के मर्म को कोई नहीं जान सका, उसे केवट ने पलभर में पहचान लिया और गंगा उतराई के बदले सीधे मोक्ष ही मांग लिया।
छठें दिन की कथा सुनाते हुए स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज ने कहा कि भय व लोभ सत्य का गला घोंट देते हैं। जहां भय व लोभ होगा, सत्य वहां टिक ही नहीं सकता हैं। भगवान श्रीराम के राज्य में भय व लोभ का प्रवेश वर्जित था। स्वामी ने केवट प्रसंग सुनाते हुए कहा कि केवट के मन में न लोभ है न ही मृत्यु का भय है।
बोले, जब केवट ने प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण को गंगा पार उतार दिया तब अपने पति के मन को जानने वाली सीता ने अपनी अंगूठी केवट को उतराई में देनी चाही। तब केवट ने कहा- नाथ आज मैं कह न पावा प्रभु। अर्थात आज मैंने सबकुछ पा लिया है। मेरे सारे दुख सारी दरिद्रता दूर हो गई है। बार-बार कहने पर केवट ने नतमस्तक होकर कहा कि आज मैंने आपको गंगा पार उतारा है। प्रभु जब मैं आपके घाट आऊं तो आप भी मुझे भवसागर पार करा देना। इस मौके पर प्रभाकर मिश्र, मुरली मनोहर गुप्ता, अनिल गुप्ता, राहुल वार्ष्णेय, विजयपाल वार्ष्णेय, सोनपाल सिंह आदि मौजूद रहे।