कटे फलों की बिक्री पर पूरी तरह रोक के बावजूद सब्जी मंडी के पास कई फल विक्रेता ऐसे हैं, जो दागी सेब और अनार को काटकर सस्ते में बेचते हैं। अच्छे सेब 80 से 100 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जबकि कटे सेब का रेट 20 रुपये प्रति किलो है।
बदायूं जिले में मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर के प्रकोप के बीच बाजार में सड़े-गले कटे फल खुलेआम बेचे जा रहे हैं। कटे फलों पर मक्खी-मच्छर भी भिनभिनाते दिखेंगे, लेकिन खाद्य विभाग की बाजार में बिकती बीमारियों पर नजर नहीं जाती। सस्ते के लालच में लोग इन्हें खरीद भी लेते हैं।
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कटे फलों की बिक्री पर पूरी तरह रोक के बावजूद सब्जी मंडी के पास कई फल विक्रेता ऐसे हैं, जो दागी सेब और अनार को काटकर सस्ते में बेचते हैं। अच्छे सेब 80 से 100 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जबकि कटे सेब का रेट 20 रुपये प्रति किलो है। सस्ते के फेर में कटे फलों के रूप में लोग बीमारियां खरीद रहे हैं। आसपास की नालियों के मक्खी-मच्छर भी कटे फलों पर भिनभिनाते रहते हैं।
इन दिनों वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बना हुआ है। डॉक्टर भी मरीजों को ताजा फल खाने की सलाह देते हैं, लेकिन कटे फलों का इस्तेमाल मरीजों में संक्रमण और बढ़ा सकता है। पिछले दिनों सामाजिक संस्था गूंज के चेयरमैन किशनचंद्र शर्मा ने इसकी शिकायत नगर परिषद पालिका कार्यालय में की, लेकिन पालिका ने इसके लिए खाद्य विभाग को जिम्मेदारी बताकर अपना पल्लू झाड़ लिया। इसके विपरीत खाद्य विभाग की ओर से अभी तक इस पर गौर नहीं किया गया है।
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फल विक्रेता बोले- कटा है तो क्या, सस्ता है
सब्जी मंडी के पास सड़क किनारे सड़े-कटे फल बेच रहे फल विक्रेताओं ने अपनी रोजी-रोटी का ही दर्द बयां करना शुरू कर दिया। एक विक्रेता ने यहां तक कह दिया कि दागी फलों को काटकर नहीं बेचेंगे तो साफ-सुधरे सेब और अनार का रेट डेढ़ सौ रुपये के पार कर जाएगा। पेटियों में दागी फल निकल आते हैं, उन्हें फेंका नहीं जा सकता। फिर, वह किसी को जबरदस्ती करीदने के लिए भी मजबूर नहीं कर रहे हैं।
चिकित्साधीक्षक ने कहा- मच्छरों से पनप रहीं बीमारियां
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राजकुमार गंगवार कहते हैं कि बुखार के मरीजों की संख्या में मच्छरों की वजह से हो रहा है। मच्छरजनित बीमारियों में ही डेंगू और मलेरिया भी शामिल है। जहां भी बुखार से मौत सामने आई है, उस इलाके में विशेष सफाई अभियान चलवाने पर जोर दिया गया है। प्रथम नमूना रिपोर्ट में भी अगर डेंगू की मरीज निकलता है, तो उसे मच्छरदानी में रखना चाहिए। उसे काटने वाला मच्छर अगर किसी को भी चपेट में लेता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। कटे फल भी इससे अछूते नहीं रहते।