बदायूं। बदलते खानपान और शरीर में कैल्शियम की कमी से बच्चों से लेकर युवाओं तक के दांत कमजोर हो रहे हैं। इसका असर ऐसा है कि हल्की सख्त चीजें खाने से दांत टूट जा रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 मरीज दांत की समस्या को लेकर आ रहे हैं। इनमें अधिकांश पान-गुटखा खाने वाले आ रहे हैं। उनके दांत टूटने लगे हैं। जिनकी वह फिलिंग कराने पहुंच रहे हैं।
गुटखा तंबाकू जहां कैंसर जैसी बीमारी को पैदा करती है वहीं दांतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। गुटखा खाने से दांत नुकीले हो जातेे हैं। धीरे-धीरे दांत कमजोर होने लगते हैं। जिले में दांत के इलाज के कोई इंतजाम नहीं हैं लेकिन फिलिंग का काम आसानी से किया जा रहा है। वजीरगंज सीएचसी पर तैनात दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सामान्य ओपीडी में मरीज टूटे हुए दांत की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। जबकि, पहले ऐसे केस बेहद कम देखने को मिलते थे। इसकी वजह फास्ट फूड और साफ्ट चीजों के खाने, रोजाना ब्रश न करने और शरीर में कैल्शियम की कमी है। गुटखा का चलन भी दांतों को कमजोर कर रहा है। गुटखा न खाने की सलाह दी जा रही है।
समस्या होने पर डॉक्टरों से करें संपर्क
डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि दांतों में दर्द होने, मसूड़ों से खून बहने, दांतों के हिलने, मुंह से बदबू आने, दांतों के रंग में बदलाव होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। समय से अगर इलाज हो जाए तो दांतों को टूटने से बचाया जा सकता है। एक बार अगर दांत टूटने लगते हैं, तो अन्य दांतों पर भी इसका असर पड़ना शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि दिन में दो बार ब्रश करने की आदत जरूर डालें। सोने से पहले और खाने के बाद ब्रश जरूर करें। खाने के दौरान स्नैक्स में मीठा और चिपचिपा खाद्य पदार्थ बिल्कुल न खाएं। तीन माह पर ब्रश बदल दें।संवाद