दातागंज में रामगंगा किनारे पड़े मृत पक्षियों के अवशेष। संवाद
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दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव पिपला में रामगंगा किनारे सैकड़ों पक्षी मरे मिले हैं। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। पक्षियों की मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। मरने वाले पक्षियों में जल कौआ, सुर्खाव, जल मुर्गा आदि शामिल हैं। इनमें कोई दुर्लभ प्रजाति या प्रवासी पक्षी नहीं है। डीएफओ अशोक कुमार सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं।
बदायूं से होकर दो बड़ी नदियां गंगा और रामगंगा बहती हैं। दोनों के किनारे प्रवासी पक्षियों का ठिकाना कई वेटलैंड भी हैं। हर वर्ष यहां सर्दियों के मौसम में साइबेरिया समेत अन्य देशों से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी आते हैं। इस वर्ष अक्तूबर मध्य रामगंगा में बाढ़ के कारण काफी इलाका बाढ़ से घिर गया था। कई स्थानों पर अब जमीन दिखने लगी है और कुछ स्थानों पर अब भी दलदली भूमि है। पिपला गांव में जो जमीन रामगंगा में पानी कम होने के बाद बाहर आ गई है, उसकी जोताई कर ग्रामीणों ने गेेहूं की फसल की बुआई कर दी है। बृहस्पतिवार सुबह ग्रामीण खेतों की ओर निकले तो देखा कि खेतों में सैकड़ों पक्षी मरे पड़े हैं।
ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग को दी। वन दरोगा हुकुम सिंह के नेतृत्व में दोपहर बाद टीम मौके पर पहुंच गई। काफी तलाश करने के बाद कुछ पक्षियों के अवशेष मिले। इन्हें कब्जे में ले लिया है। कई पक्षियों के शवों को जंगली जानवरों और कुत्तों ने खा लिया। डीएफओ अशोक कुमार सिंह ने पक्षियों की मौत के कारण की जांच का आदेश दिया है।
गेहूं बीज की दवाओं को माना जा रहा कारण
प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि पक्षियों की मौत का कारण गेेहूं के बीज में दवा मिला होना है। दरअसल, हाल ही में पिपला के किसानों ने रामगंगा में पानी कम होने के बाद बाहर आई जमीन पर गेहूं की बुआई की है। माना जा रहा है कि गेहूं के जिस बीज की खेतों में बुआई की है, पक्षियों ने उस बीज को चुग लिया होगा। बीज में दवाई लगी होने के कारण पक्षियों की मौत हुई है।
दातागंज रेंज के गांव पिपला में रामगंगा किनारे खेतों में मरे हुए पक्षी मिलने की सूचना पर टीम को भेजा गया। काफी तलाश के बाद पक्षियों के कुछ अवशेष मिले हैं। पक्षियों के मरने के कारणों की जांच की जा रही है। संभवत: पक्षियों की मौत गेहूं के बीज चुगने के कारण हुई है। जांच के बाद स्थिति साफ हो सकेगी। -अशोक कुमार सिंह, डीएफओ