नूरपुर के जहीर के घोड़ों और गधों का सैंपल अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार, हरियाणा को भेजे गये थे, जिनमें से एक गधा और दो घोड़ों में पहले ही ग्लैंडर की पुष्टि हुई थी, जिनको पहले ही मार के दफना दिया गया था। अब एक और घोडे़ के सैंपल में रोग की पुष्टि हुई जिसे जिलाधिकारी के आदेश पर जहर का इंजेक्शन लगा कर मार कर दफना दिया गया। बीमारी से ग्रसित घोडे़ को मारने की टीम में पशु चिकित्साधिकारी डा. अमित सक्सेना, डा. विवेक गौरव, पशुधन प्रसार अधिकारी योगेश कुमार शामिल रहे।