बदायूं। आर्थिक तौर पर कमजोर अभिभावकों ने अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने का सपना देखा था, जो पूरा नहीं हो सका। तमाम भागदौड़ और अभिलेखों को पूरा करने के बाद में भी उनके लिए स्कूलों को आवंटन नहीं हो सका।
प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को निशुल्क में शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) योजना संचालित की है। इसमें जिले से आवेदन किए गए। पहले चरण में 3130 बच्चों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया था। जांच में 2646 सही मिले, लॉटरी सिस्टम के तहत 942 को स्कूलों को आवंटन हुआ और 1704 को स्कूल नहीं मिल सके। दूसरे चरण में 812 में से 693 के आवेदन सही पाए गए। 548 को स्कूल का आवंटन हुआ। वहीं 145 का एडमिशन नहीं हो सका। तीसरे चरण में 614 में से 488 के आवेदन सही मिले। 462 को स्कूल का आवंटन किया और 26 गैरहाजिर रहे। चौथे चरण में 700 में 647 के आवेदन सही मिले। लेकिन 613 को स्कूल का आवंटन किया और 34 गैरहाजिर रहे।
प्रवेश के नियम
शिक्षा के अधिकार योजना के तहत हर निजी स्कूल में निर्धारित संख्या की 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के लिए रिजर्व रखने के निर्देश हैं। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के उद्देश्य है। इसमें फीस, यूनिफार्म, पाठ्य-पुस्तकें, मिड-डे मील, परिवहन पर बच्चे को कोई भी धनराशि नहीं देनी होगी। सरकार ऐसे बच्चों को निशुल्क स्कूलिंग उपलब्ध कराएगी।
आरटीई के तहत दाखिले के चारों चरण पूरे हो चुके हैं, जो विद्यार्थी रह गए हैं। वे अगले साल आवेदन कर सकेंगे। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए