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Budaun News: ...अरे यहां न कराना इलाज कहकर मरीजों को झांसा दे रहीं महिलाएं

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महिला अस्पताल से गर्भवती को बहलाफुसलाकर निजी अस्पताल ले जाती महिला दलाल। संवाद
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बदायूं। अरे...यहां प्रसव न कराना, डॉक्टर व कर्मचारी लापरवाह हैं। जान पर आफत बन सकती है, हम अच्छे और निजी डॉक्टर को जानते हैं। उन जगहों पर इलाज बेहतर होगा और कम दामों पर अच्छी सुविधा मिल सकेगी।
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जिला महिला अस्पताल में आ रहे मरीजों को एक नेटवर्क इस तरह की बातें कर बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाता है। इसके बदले उन्हें कमीशन में 10 से 15 हजार रुपये मिलते हैं।
जिला महिला अस्पताल में बड़े स्तर पर एक नेटवर्क संचालित है। इनमें दो महिलाएं अस्पताल के बाहर सक्रिय रहती हैं, मरीजों को बेहतर सुविधाएं कम खर्चे में दिलाने का दावा करते हुए निजी अस्पताल के लिए डायवर्ट करती हैं। ऐसे केस सामने आने के बाद सीएमएस ने महिला पुलिस की तैनाती कराने और ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
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शनिवार को बिसौली थाना क्षेत्र के गांव भूड़ की रेशमा के साथ भी यही हुआ। उनके परिजनों को इस नेटवर्क के लोगों ने इतना डराया कि उन्होंने बात मान ली और निजी अस्पताल में जाकर प्रसव करा लिया।
वहीं, शुक्रवार को जरीफनगर से परिजन सुनीता को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल लेकर आए थे। यहां दो महिला और दो पुरुष ने उन्हें घेर लिया। कहा, यहां प्रसव कराने पर जच्चा-बच्चा दोनों के लिए रिस्क रहेगा। डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक सब लापरवाह हैं। मरीज चीखता-चिल्लाता रहता है, कोई देखने और सुनने वाला नहीं है। वे सिर्फ 15 हजार रुपये में प्राइवेट अस्पताल में सामान्य प्रसव करा देंगे।

इन लोगों ने उनके परिजनों को इस कदर डरा दिया कि वे प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने के लिए राजी हो गए। विभागीय अधिकारियों तक यह मामला पहुंचा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।


एक केस पर मिलता है पांच से 10 हजार रुपये कमीशन
महिला अस्पताल से गर्भवती को निजी अस्पताल लाने पर पांच से 10 हजार रुपये तक मिलते हैं। निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के लिए 15 से 20 हजार रुपये लिए जाते हैं। वार्ड का चार्ज और दवाओं का खर्च अलग से लिया जाता है। ऑपरेशन से प्रसव के 40 से 50 हजार रुपये वसूले जाते हैं।
इन परिस्थितियों में किया जाता है रेफर
जिला महिला चिकित्सालय में पहुंचने वाली गर्भवतियों को भर्ती करने से पहले चिकित्सक या वहां मौजूद स्टाफ उनकी स्वास्थ्य संबंधी प्रोफाइल को देखते हैं। यदि जांच में हीमोग्लोबीन का स्तर आठ या उससे कम पाया जाता है तो हालत गंभीर बताकर हायर सेंटर ले जाने की सलाह दे दी जाती है। इसके अलावा भी मरीज को भर्ती न करने के तमाम बहाने बना दिए जाते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल में इन तमाम कारणों को दरकिनार कर प्रसव करा दिया जाता है।

अस्पताल में दलालों द्वारा गर्भवतियों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने की शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। दलालों को संरक्षण देने वालों को भी चिह्नित किया जा रहा है। उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। महिला कांस्टेबल को तैनात करने की मांग की है। जल्द ही दलालों पर कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ. इंदुकांत, सीएमएस जिला महिला अस्पताल

महिला अस्पताल से गर्भवती को बहलाफुसलाकर निजी अस्पताल ले जाती महिला दलाल। संवाद

महिला अस्पताल से गर्भवती को बहलाफुसलाकर निजी अस्पताल ले जाती महिला दलाल। संवाद

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