बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में शनिवार को डॉक्टरों के बीच तकरार हो गई। मामला संज्ञान में आने के बाद सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार ने सभी ईएमओ और रेंजीडेंटल डॉक्टरों को आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि भविष्य में ऐसा कृत्य न करें। यह भी चर्चा है कि डॉक्टरों के बीच की यह तकरार गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गई थी।
दरअसल, मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में शनिवार को एक गंभीर घायल पहुंचा था। मेडिकल कॉलेज में चार ईएमओ की तैनाती है। इमरजेंसी में किसी गंभीर घायल के पहुंचने पर पहला काम ईएमओ का होता है। मेडिकोलीगल के साथ पुलिस को सूचना देना भी ईएमओ की जिम्मेदारी है। सर्जरी विभाग में रेजीडेंटल डॉक्टर ने मरीज को भर्ती तो कर लिया, लेकिन ईएमओ संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। सर्जरी विभाग के रेजीडेंटल डॉक्टर ने मरीज की बीएचटी पर ईएमओ के लिए औपचारिकताओं के संबंध में लिख दिया। चार ईएमओ होने के बाद भी उस समय कोई ईएमओ ड्यूटी पर नहीं था। कुछ देर के बाद एक ईएमओ पहुंच गए और उनकी रेजीडेंटल डॉक्टर से तकरार हो गई। चर्चा यह भी है कि दोनों के बीच विवाद गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गया था।
मामला एचओडी सर्जरी डॉ. विपिन तक पहुंचा तो वह भी सर्जरी विभाग पहुंच गए। मामले को संज्ञान लेते हुए उन्होंने सर्जरी विभाग के डॉक्टरों को चेतावनी जारी की है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे कृत्य की भविष्य में पुनरावृत्ति न हो। अगर कोई मसला है तो उसको आपस में बात कर समन्वय स्थापित करते हुए निर्णय लें। एचओडी ने कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
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प्राचार्य ने रिसीव नहीं की कॉल, एचओडी ने पल्ला झाड़ा
प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता को कई बार कॉल करने पर भी उन्होंने उसे रिसीव नहीं की। हालांकि, शनिवार को जब यह विवाद हुआ था तो उसके बाद उन्होंने कॉल पर हुई बात में कह दिया कि वह अभी विभागीय काम से बाहर हैं। सोमवार या मंगलवार में बदायूं आने के बाद ही इस बारे में कुछ कह सकते हैं। दूसरी ओर इस संबंध में एचओडी सर्जरी डॉ. विपिन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह विभागीय मसला है, लेकिन ऑफिस की बात ऑफिस में ही की जाएगी।
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...तो मेडिकल कॉलेज में सब ठीक नहीं
मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष की ओर से जारी आदेश में जिस तरह के तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया गया है उससे साफ है कि मेडिकल कॉलेज में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। डॉक्टरों की गुटबंदी के बीच मरीजों को पिसना पड़ रहा है। सबसे बुरा हाल सर्जरी विभाग का ही है। यहां पांच से सात छोटी-मोटी सर्जरी ही रोज होती हैं, जबकि सर्जन के रूप में दस डॉक्टरों की तैनाती है।
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झगड़ा या हाथापाई जैसी कोई बात मेरी जानकारी में नहीं आई है। मैं कांफ्रेंस में शामिल होने बाहर गया था। सर्जरी विभाग में किसी मामले को लेकर कुछ तकरार जैसी जानकारी मिली है। सोमवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद इस बारे में कुछ बता सकूंगा। बेहतर होगा कि इस संबंध में बात एचओडी, सर्जसे ही की जाए।
- डॉ. सीपी सिंह, सीएमएस राजकीय मेडिकल कॉलेज