बदायूं। बुखार के साथ जिले में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को भी जिले में डेंगू के दो और मलेरिया के 12 मरीज मिले। दस गांवों में बुखार के भी 214 मरीज मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा 80 मरीज सोबनपुर में मिले हैं। डेंगू का एक मरीज सोबनपुर तो दूसरा शहर के नेकपुर में मिला है।
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से समरेर, जगत, सालारपुर और दातागंज ब्लॉक के दस गांवों में कैंप का आयोजन किया गया। इस दौरान 561 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें 214 बुखार के मरीज मिले। 370 लोगों की जांच में मलेरिया के 12 और डेंगू के दो मरीज मिले।
इसी क्रम में जगत के दौरी निरोत्तमपुर में बुखार के 30, कुंडेली में 32 तो दातागंज के बक्सेना में 20 और मोहल्ला परा में 15 मरीज मिले। समरेर के जयपालपुर, नूरपुर, सालारपुर के मोगर, रैपुरा और अर्सिस में भी बुखार का प्रकोप है। मलेरिया विभाग की टीमों ने मेडिकल कॉलेज समेत 60 स्थानों पर लार्वा तलाश किया। जिसमें 15 स्थानों पर लार्वा मिला। मेडिकल कॉलेज के बेसमेंट में पानी भरा है। अंदर आने का रास्ता न होने के कारण यहां लार्वा तलाश नहीं किया जा सका। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में बुधवार को डेंगू के दो मरीज मिले थे। बृहस्पतिवार को यहां फॉगिंग कराई गई। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने भी कई स्थानों पर जायजा लिया।
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मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में मच्छरदानियां तक नहीं
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बुधवार को स्टाफ के ही दो कर्मचारियों को डेंगू की पुष्टि हुई थी। यहां 30 बेड के डेंगू वार्ड में डेंगू के दो रोगियों का इलाज चल रहा है। बृहस्पतिवार को मलेरिया निरीक्षक महेंद्र टीम के साथ निरीक्षण को मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां डेंगू वार्ड में मच्छरदानियां तक नहीं थीं। -
सोबनपुर के हर घर में बुखार का मरीज
मूसाझाग। जगत ब्लॉक के गांव सोबनपुर में बुखार का व्यापक प्रकोप है। हालात यह हैं कि गांव में कोई भी घर ऐसा नहीं है जहां एक दो लोग बुखार पीड़ित न हो। कई घर तो ऐसे हैं जहां पूरे-पूरे परिवार बुखार की चपेट में हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने यहां पहले दिन कैंप लगवाया तो बुखार के 130 मरीज मिले। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी गांव में बुखार के 80 मरीज मिले हैं। यहां अब तक डेंगू के दो और मलेरिया के सात मरीज मिल चुके हैं।
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कुछ गांवों में बुखार का प्रकोप बना हुआ है। बुखार या मच्छरजनित बीमारियों से अब तक जिले में कोई मौत नहीं हुई है। मलेरिया के साथ डेंगू के मरीज भी मिल रहे हैं। हालांकि, पिछले वर्षों के मुकाबले मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों को लेकर इस वर्ष स्थिति ज्यादा बेहतर है। गांवों में लगातार स्वास्थ्य कैंपों के आयोजन के साथ दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ