बदायूं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना 2018 में लागू हुई थी, लेकिन अब तक बदायूं के गरीबों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। शासन स्तर की सख्ती के बाद भी जुलाई का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। जुलाई में अभियान चला कर अंत्योदय और बीपीएल कार्ड धारकों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने थे, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती से यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका। जो नए कार्ड जारी भी किए गए हैं उनमें भी गलतियों की भरमार है।
जिले में में 45 हजार ऐसे लोग हैं जो 2011 की जनगणना के मुताबिक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इनको अंत्योदय और बीपीएल कार्ड भी जारी किए गए हैं। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को भी आयुष्मान कार्ड जारी नहीं हो सके हैं। 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 11.20 लाख लाभार्थियों के सापेक्ष मात्र 2.51 लाख को ही आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा सके हैं। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को जिले में पलीता लगाया जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना में जिले में 244970 परिवारों के 1120130 लाभार्थियों को आयुष्मान जारी करने का लक्ष्य दिया गया था। इनमें 45 हजार से ज्यादा अंत्योदय और बीपीएल परिवार भी शामिल थे।
काबिले गौर यह है कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को चार साल से ज्यादा वक्त हो चुका है, लेकिन अब तक 2011 की जनगणना के मुताबिक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लाभ नहीं दे सका है। जो कार्ड जारी किए गए हैं उनमें गलतियों की भरमार है। ऐसे में कार्ड मिलने के बाद भी गरीब मुफ्त इलाज का लाभ नहीं ले पा रहे।
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सिर्फ नाम का अभियान, लक्ष्य तो पूरा ही नहीं हुआ
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने जुलाई माह में विशेष अभियान चला कर कम से कम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को आयुष्मान कार्ड जारी करने की बात कही थी। अभियान भी चलाया गया। एक माह में 44 हजार लोगों को कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन इसके सापेक्ष 21 हजार लोगों को ही कार्ड जारी किए जा सके हैं। जो कार्ड जारी किए गए हैं उनमें भी तमाम गलतियां हैं। सीएमओ के पास शिकायतें भी आते हैं। कार्यदायी संस्था के पास भी शिकायत की जाती है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है।
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कैंसर के रोगी का नाम गलत, भटकने को मजबूर
दातागंज तहसील का ब्लॉक समरेर के गांव बौरा निवासी जगपाल को कैंसर है। उनके पास प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी है, लेकिन उनको इलाज नहीं मिल पा रहा। परिवार वालों ने उनको एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से उनको रेफर कर दिया गया। वह बड़े अस्पताल पहुंचे। उनको लगा कि आयुष्मान कार्ड का लाभ मिलेगा, लेकिन कार्ड में उनका नाम जगराम था और आधार कार्ड में जगपाल था। ऐसे में उनको लाभ नहीं मिल सका। परिवार के लोगों ने सीएमओ और कार्यदायी संस्था से शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इस वक्त वह जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सीएमओ से लिखित शिकायत भी की है।
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प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड जारी करने का काम चल रहा है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिले इसकी भरसक कोशिश की जा रही है। कार्यदायी संस्था को भी निर्देशित किया गया है। लक्ष्य के सापेक्ष काम न नहीं हो पा रहा है। राशन कोटेदार भी सहयोग नहीं कर रहे। कहीं कोई त्रुटि हुई है तो उसको दिखवाया जाएगा।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ