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कोरोना के एक दिन में 30 मरीज मिले, 17 सिर्फ जिला जेल में

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जिला अस्पताल की ओपीडी में सैंपल लेने को पहुंची टीम। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले में बृहस्पतिवार को एक दिन में कोरोना के 30 मरीज मिलने के साथ जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है। बृहस्पतिवार को छह रोगी स्वस्थ भी हुए हैं। बृहस्पतिवार को मिलने वाले कुल मरीजों में 17 अकेले जिला जेल के हैं।
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कोरोना संक्रमण की रफ्तार जुलाई के दूसरे सप्ताह से बढ़नी शुरू हुई थी। इस दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में आरटीपीसीआर जांच भी बंद हो गई। आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल अब नोएडा भेजे जा रहे हैं। बुधवार को जिले में 1868 सैंपल लिए गए थे। इनमें 944 की आरटीपीसीआर और 919 की एंटीजन जांच कराई गई। आरटीपीसीआर जांच में 20 और एंटीजन जांच में 10 लोगों को संक्रमण की पुष्टि हुई। जिला जेल में जिन 17 बंदी और कैदियों को संक्रमण की पुष्टि हुई है उन सभी की आरटीपीसीआर जांच कराई गई थी। इसके अलावा जगत, सालारपुर, उसावां और इस्लामनगर में भी नए रोगी मिले हैं। कांट्रैक्ट एंड ट्रेसिंग ऑफिसर कोविड-19 डॉ. रजनीश शर्मा ने बताया कि नए मिले संक्रमितों को ट्रेस किया जा रहा है। सभी को होम क्वारंटीन किया गया है। जिले में अब सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है।
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इस तरह बढ़ी संक्रमण की रफ्तार
- 20 जुलाई- 07
- 21 जुलाई- 04
- 22 जुलाई- 04
- 23 जुलाई- 04
- 24 जुलाई- 07
- 25 जुलाई- 06
- 26 जुलाई- 03
- 27 जुलाई- 11
- 28 जुलाई- 30
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पड़ोसी राज्यों और जिलों में मंकीपॉक्स के साथ स्वाइन फीवर के मामले में सामने आने लगे हैं। इन दिनों कोरोना संक्रमण की रफ्तार भी खतरनाक तरीके से बढ़ रही है। संक्रामक बीमारियों खासकर कोरोना, मंकीपॉक्स और स्वाइन फीवर को लेकर अलर्ट किया गया है। रैपिड रेस्पांड टीमों का गठन कर दिया गया है।
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-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
कोरोना के खतरे के बीच मंकीपॉक्स, अब स्वाइन फीवर को लेकर भी अलर्ट
बदायूं। कोरोना संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। इस बीच मंकीपॉक्स का खतरा मंडरा रहा था, पर अब जिले में स्वाइन फीवर का खतरा भी पैदा होने लगा है। पड़ोसी राज्यों और जिलों में स्वाइन फीवर के रोगी मिलने के बाद बदायूं में अलर्ट कर दिया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों को सतर्कता बरतने की हिदायत के साथ जिला स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन कर दिया गया है।
स्वाइन फीवर के लिहाज से बदायूं भी संवेदनशील है। वर्ष 2010 से 2017 के बीच यहां स्वाइन फीवर के मामले निकलने के साथ मौतें भी हो चुकी हैं।
जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी बड़ी हुई है। बृहस्पतिवार को एक दिन में 30 नए संक्रमित मिले हैं। इधर, हाल ही के दिनों में दिल्ली में मंकीपॉक्स के मामले सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। अब दिल्ली के अलावा राजस्थान, उत्तराखंड और पड़ोसी जिले मुरादाबाद में स्वाइन फीवर के मामले भी सामने आने लगे हैं। ऐसे में स्वाइन फीवर को लेकर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्वाइन फीवर के संक्रमण का प्रकोप जुलाई से फरवरी तक होता है। स्वाइन फीवर (एच-1एन-1) के लिहाज से बदायूं संवेदनशील श्रेणी में रहता है। ऐसे में खतरे को देखते हुए एडवाइजरी जारी करने के साथ रैपिड रेस्पांस टीम का गठन किया गया है।
निजी नर्सिंगहोम संचालकों को भी निर्देशित किया गया है कि अगर स्वाइन फीवर के लक्षणों से संबंधी कोई रोगी आता है तो वे इस बारे में स्वास्थ्य विभाग की संक्रामक रोग नियंत्रण सेल को सूचना दें।
कोरोना रोगियों के लिए पहले से अलग कोविड अस्पताल हैं। हालांकि, इन दिनों किसी संक्रमित को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही। अब जिला अस्पताल समेत राजकीय मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी में भी मंकीपॉक्स के साथ स्वाइन फीवर के रोगियों के लिए भी वार्ड आरक्षित करने का आदेश दिया गया है।
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श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है स्वाइन फीवर
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि कोरोना और स्वाइन फीवर संचारी रोग हैं। संक्रमित रोगियों को अलग वार्ड में ही रखा जाता है। मंकी पॉक्स के लक्षण कुछ अलग हैं। फिलहाल जिले में मंकीपॉक्स या स्वाइन फीवर का कोई मरीज नहीं मिला है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने बताया कि स्वाइन इंफ्लूएंजा एच-1एन-1 वायरस से होता है। यह वायरस श्वसन तंत्र में इंफेक्शन कर देता है। ऐसे संक्रमितों के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड तैयार है।
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बदायूं में रहता है स्वाइन फीवर का प्रकोप
बदायूं में स्वाइन फीवर का प्रकोप भी रहता है। 2010 में ककराला निवासी जितिन प्रकाश गुप्ता की (एच-1एन-1) स्वाइन फीवर से मौत हो गई। 2012 में ककराला निवासी अशरफुलनिशा पत्नी डॉ. अब्दुल हनीफ स्वाइन फीवर की चपेट में आईं। समय रहते इलाज से इनकी जान बच गई। फरवरी 2015 में उझानी के गांव सिरसोली में नफीस की स्वाइन फीवर से जान चली गई थी। उन दिनों वह दिल्ली से लौटा था। स्वाइन फीवर की पुष्टि होने के बाद उसे एसजीपीजीआई लखनऊ में भर्ती कराया गया था। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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स्वाइन फीवर के लक्षण
लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, ठंड लगना, कमजोरी, शरीर और मांसपेसियों में दर्द। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को गंभीर संक्रमण का खतरा होता है। इसके अलावा सूखी खांसी, दस्त, मतली या उल्टी, ठंड लगना, थकान, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्वाइन फीवर वायु जनित श्वसन बूंदों (खांसी या छींक) के माध्यम से, दूषित सतह को छूने से, लार के माध्यम से, त्वचा से त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है।
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