- तीन दिवसीय बुद्ध कथा के पहले दिन बताई दान देने और लेने वाले की पात्रता
संवाद न्यूज एजेंसी
उघैती। कस्बे में तीन दिवसीय बुद्ध कथा के मंगलवार को पहले दिन कथावाचक शिखा शाक्य व रोशनी शाक्य ने दान देने और लेने वाले की पात्रता का वर्णन किया।
उन्होंने कहा, भगवान अहंकारी की भेंट कभी स्वीकार नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध एक दिन पेड़ के नीचे बैठे हर भक्त की भेंट स्वीकार कर रहे थे। तभी एक वृद्धा आई। उसने कांपती आवाज में कहा, ‘भगवन, मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास केवल खाया हुआ आधा आम ही है। गौतम बुद्ध ने उस अधखाए आम को वृद्धा से लेकर अपने पात्र में ऐसे रख लिया मानो कोई अनमोल रत्न हो।
कथा वाचक ने कहा कि वहां उपस्थित राजा यह देखकर चकित रह गया। उसे समझ नहीं आया कि भगवान बुद्ध वृद्धा का जूठा आम प्राप्त करने के लिए आसन छोड़कर नीचे तक हाथ पसार कर क्यों आए। पूछा, भगवन इस वृद्धा में और इसकी भेंट में ऐसी क्या विशेषता है। बुद्ध मुस्कुराकर बोले- राजन, इस वृद्धा ने अपनी संपूर्ण संचित पूंजी मुझे भेंट कर दी, जबकि आप लोगों ने अपनी संपूर्ण संपत्ति का केवल एक अंशमात्र ही मुझे भेंट किया है। दान के अहंकार में डूबे हुए बग्घी पर चढ़कर आए हो। वृद्धा के मुख पर कितनी करुणा और कितनी नम्रता थी। युगों बाद ऐसा दान मिलता है। इस मौके पर डॉ. दिलीप कुमार, यादराम, अरवन कुमार, अशोक कुमार, नेत्रपाल सिंह, डॉ. महेंद्र, वीरेंद्र सिंह, विजय सिंह, अरविंद कुमार, दीनदयाल, विनोद भारती आदि मौजूद रहे।