इतना ही नहीं वर्ष 2022-23 में 88.44 रुपये का डीजल खर्चा हो गया। यह डीजल खर्च यहीं नहीं रुका इस साल 2023 में मई माह तक 12.61 लाख रुपये का डीजल और खर्चा हो गया। इन पांच सालों में 5.33 करोड़ रुपये का डीजल तब खर्चा हो गया जब नगर पालिका परिषद के सारे जनरेटर वर्षों से खराब पड़े हैं। अगर इस मामले की ठीक से जांच करा ली गई तो कई कर्मचारी, अधिकारी और नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल पर सवाल उठना तय है।
ये है डीजल खर्चे का वार्षिक हिसाब
- वर्ष 2017-18 - 41.61 लाख
- वर्ष 2018-19 - 81.16 लाख
- वर्ष 2019-20 - 78.80 लाख
- वर्ष 2020-21 - 1.11 करोड़
- वर्ष 2021-22 - 1.61 करोड़
- वर्ष 2022-23 - 88.44 लाख
- वर्ष 2023 मई माह तक - 12.61 लाख
कोरोना काल में बिजली कम गई, फिर भी फूंकते रहे डीजल
पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण काल में बिजली व्यवस्था काफी ठीक रही। उस दौरान आपूर्ति भी बढ़ गई थी। क्योंकि उस वक्त तमाम सरकारी विभाग, दुकानें प्रतिष्ठान बंद थे। इससे ज्यादा बिजली खर्च नहीं हो रही थी। उस दौरान शहर भी पूरा बंद पड़ा था। नगर पालिका के जनरेटरों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा रहा था। बावजूद इसके डीजल कागजों में फुंक रहा था।
नगर पालिका के 26 ट्यूबवेल में 12 पर लगे हैं जेनरेटर
नगर पालिका परिषदीय क्षेत्र में कुल 26 ट्यूबवेल हैं। अगर इनमें जनरेटर की बात करें तो केवल 12 ट्यूबवेल पर ही जनरेटर लगे हैं। इनमें मीरा जी की चौकी, प्रोफेसर कॉलोनी, संगीता चौक, नाहर खां सराय, सोथा की चढ़ाई और आंबेडकर छात्रावास के नजदीक समेत 12 जनरेटर शामिल हैं।