जिले की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की ओर हुक्मरानों का ध्यान नहीं जाता। कहीं स्वास्थ्य केंद्रों में उपले थोपे जाते हैं तो कहीं स्वास्थ्य केंद्र पशुओं को बांधने और भूसा भरने के काम आ रहे हैं। इससे भी बुरा हाल दबतोरी ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहां दवाइयां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बांटता है। अस्पताल में सिर्फ एक डॉक्टर की तैनाती है। इलाके के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा। पीएचसी में न तो मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है और न ही पर्याप्त दवाएं। जिले में 12 सीएचसी, पांच पीएचसी और 43 न्यू पीएचसी हैं। मानक के अनुरूप पीएचसी पर एक महिला डॉक्टर समेत चार डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। दबतोरी पीएचसी पर सिर्फ एक डॉक्टर की तैनाती है। करीब छह महीने पहले दबतोरी ब्लॉक का गठन होने के बाद पीएचसी का आधा भवन ब्लॉक कार्यालय के संचालन के लिए दे दिया गया था। गौर करने वाली बात यह है कि यहां ब्लॉक कार्यालय का भी संचालन नहीं हो रहा। इलाके के लोगों को अब भी आसफपुर और बिसौली ब्लॉक की दौड़ लगानी पड़ रही है। रही बात स्वास्थ्य सेवाओं की दोपहर के बाद पीएचसी भी बंद हो जाती है। अगर रात में किसी की तबीयत बिगड़ती है तो मरीज को लेकर परिवार वालों को आसफपुर सीएचसी या फिर बिसौली की दौड़ लगानी होती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस पर गौर नहीं कर रहे। इसका खामियाजा दबतोरी के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा का कहना है कि अगर स्टाफ और दवाओं की किल्लत है तो इसे देखकर जहां तक संभव है पूरा कराया जाएगा।