बदायूं में जिला सत्र न्यायाधीश पंकज अग्रवाल ने बृहस्पतिवार शाम ऑनर किलिंग के एक मामले में नामजद माता-पिता समेत चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने चारों मुजरिमों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह मामला वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव उरैना का है। गांव के पप्पू ने 14 मई, 2017 को थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पप्पू के मुताबिक उनके 25 साल के बेटे गोविंद का गांव के ही किशनपाल की बेटी आशा से प्रेमप्रसंग चल रहा था। हत्याकांड से दो माह पहले गोविंद और आशा गांव छोड़कर भाग गए। किशनलाल और उसके परिवार वाले दोनों को शादी कराने के बहाने बुलाकर ले आए थे। किशनलाल ने कह दिया था कि दोनों लोग शादी की तैयारी करें।
इसी दौरान 14 मई को किशनलाल और उसकी पत्नी जलधारा ने शादी की तैयारियों के बारे में बात करने के बहाने गोविंद को अपने घर में बुलाया था। यहां उस पर कुल्हाड़ी और गड़ासे से हमला कर दिया। आशा उसे बचाने आई तो उन्होंने आशा के ऊपर भी हमला कर दिया। मुजरिम दोनों की हत्या करके भाग गए। इसमें पप्पू ने किशनलाल, उसकी पत्नी जलधारा, किशनलाल के सौतेले बेटों विजयपाल और रामवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस ने विवेचना कर चारों मुजरिमों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बृहस्पतिवार देर शाम जिला सत्र न्यायाधीश पंकज अग्रवाल ने तमाम साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर चारों मुजरिमों को फांसी की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से डीजीसी क्रिमिनल अनिल सिंह राठौर ने पैरवी की।