अहमदनगर बछौरा में कटान करतीं गंगा। संवाद
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बदायूं। गंगा का जलस्तर पिछले कई दिनों से लगातार खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है। ऐसे में तटवर्ती गांवों में हालात बिगड़ने लगे हैं। उसहैत में गंगा के उस पार के गांवों में पानी घुस गया है। यहां के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। लगातार हो रहे कटान के कारण अहमदनगर बछौरा, जटा, असमया रफतपुर गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
बुधवार को मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर 162.42 दर्ज किया गया। इस बीच बुधवार को नरौरा से 72172, बिजनौर से 42198 और हरिद्वार से गंगा में 80598 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हरिद्वार से छोड़ा गया पानी अगले चौबीस घंटे में नरौरा होता हुआ कछला तक पहुंच जाएगा। गंगा में उफान के बीच दातागंज और सहसवान तहसील के 20 गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। सहसवान के तटवर्ती गांवों में भी गंगा कटान कर रही है। असमया रफतपुर और अहमदनगर बछौरा में अब भी कटान हो रहा है। हालांकि, गंगा-महावा, उसहैत और उसावां तटबंधों के जिन स्थानों पर कटान हो रहा था वहां अब कटान रोकने के उपाय किए जाने के बाद हालात कुछ सुधरे हैं।
सहसवान तहसील के कई तटवर्ती गांवों में कटान के कारण अब तक सैकड़ों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। प्रशासन की ओर से बाढ़ ग्रस्त गांवों में राहत और बचाव के काम शुरू कर दिए गए हैं। आने वाले दिनों में जलस्तर में और इजाफा होता है तो करीब 20 गांवों के लिए बड़ा खतरा पैदा होने की संभावना है। हालांकि, बाढ़ खंड और प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए हैं।
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गंगा मीटरगेज पर 162.42 मीटर पर है। मीटरगेज पर खतरे का निशान 162 मीटर है। जिन स्थानों पर कटान हो रहा है वहां कटान रोकने की व्यवस्था की जा रही है। असमदनगर बछौरा और असमया रफतपुर में हालात ज्यादा बिगड़ रहे हैं, लेकिन हालात पर पूरी नजर रखने के साथ बाढ़ बचाव कार्य भी किए जा रहे हैं।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड