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बेटे की दुकान में लगी आग, सदमे में बुजुर्ग मां ने दम तोड़ा

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बिसौली (बदायूं)। कस्बे के मुख्य बाजार में रविवार रात बेटे की दुकान में आग लगने की सूचना पर सदमे में बुजुर्ग मां निर्मला देवी ने प्राण त्याग दिए। जिस वक्त हादसा हुआ था, उस दौरान निर्मला देवी दुकान के ऊपर बने मकान में मौजूद थीं। वह दुकान देखने के लिए नीचे उतरकर आईं थीं लेकिन परिवारवालों ने उन्हें ऊपर भेज दिया। वह बेटे का नुकसान सहन नहीं कर पाईं और हार्टअटैक से मौत हो गई।
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कस्बे में मुख्य बाजार निवासी उर्मिला देवी के चार बेटे हैं। चारो बेटों के अलग-अलग मकान हैं। सभी की शादी हो चुकी है और अपना व्यापार कर रहे हैं। रविवार रात वह अपने बेटे संजीव के घर पर मौजूद थीं। यह घर छोटे बेटे मनीष की दुकान के ऊपर बना हुआ है जबकि मनीष दुकान के बराबर में बने मकान में रहते हैं। परिवार वालों के मुताबिक रात करीब दो बजे सभी लोग सो रहे थे। इसी दौरान अचानक मनीष की दुकान में शॉर्टसर्किट से आग लग गई। जब उसका धुआं ऊपरी मंजिल पर पहुंचा, तभी संजीव जाग गए। उन्होंने नीचे आकर देखा तो दुकान में बिजली के बोर्ड के बराबर में आग लग चुकी थी और कपड़ों तक पहुंच रही थी। इस पर उन्होंने परिवार के लोगों को जगाया। शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुला लिया। मनीष को भी सूचना दे दी।
घर में शोरशराबा सुनकर उर्मिला देवी भी जाग गई। उन्होंने परिवार के लोगों से पूछा कि यह कैसा शोरशराबा हो रहा है। संजीव ने उन्हें बताया कि मनीष की दुकान में आग लग गई है। हम आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। उर्मिला बेचैन हो गईं। वह जीना उतरकर नीचे भी आईं लेकिन तब तक मौके पर तमाम लोग आ गए थे। उन्होंने कहा आप ऊपर चली जाओ हम आग बुझा रहे हैं। इससे उर्मिला देवी ऊपर मकान में तो चली गईं लेकिन उनकी बेचैनी बढ़ गई। वह चारपाई पर लेट गईं। उन्होंने पुकारा कि उन्हें ज्यादा बेचैनी हो रही है। चूंकि परिवार वाले आग बुझाने में लगे थे। वे कुछ समझ पाते उससे पहले उर्मिला देवी की मौत हो गई। आग बुझाने के कुछ देर बाद जब परिवारवालों का उन पर ध्यान गया, तब तक वह अपने प्राण त्याग चुकी थी। सोमवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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दुकान में एक लाख का हुआ नुकसान
परिवारवालों के मुताबिक हादसे में दुकान में एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मनीष की चंदौसी क्लॉथ हाउस के नाम से दुकान है। दुकान में बिजली के बोर्ड में पहले आग लगी थी। उसके बाद नजदीक में रखे कपड़े में आग लग गई थी। इससे कपड़े के कुछ थान जल गए।
बेटों से बहुत प्यार करती थीं उर्मिला देवी
70 वर्षीय उर्मिला देवी के चारो बेटे भले ही अलग-अलग मकान में रह रहे थे लेकिन उर्मिला देवी सभी को बहुत प्यार करती थीं। उन्हें अपने बेटों का नुकसान बर्दाश्त नहीं था। वह कहती थीं कि बेटे इतनी मेहनत करते हैं। कम से कम उन्हें अपनी मेहनत का फल तो मिलना चाहिए। चारों बेटे भी उनका खूब ध्यान रखते थे।
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