बदायूं। संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील 253 गांवों में से 35 से ज्यादा गांवों में इन दिनों वायरल फीवर का व्यापक प्रकोप बना हुआ है। हालांकि, इस बार अब तक संक्रामक रोगों को लेकर हालात नियंत्रण में हैं। इस बीच पिछले दिनों बुखार, डायरिया से जगत के रायपुर, सालारपुर के सादुल्लापुर और उझौली में तीन लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य और मलेेरिया विभाग युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। मंडल स्तर से भी जिले में मॉनीटरिंग की जा रही है।
जिले में जगत, समरेर, सालारपुर, म्याऊं और दातागंज ब्लॉक के 235 गांवों के अलावा कस्बा सैदपुर 2019 से संक्रामक रोगों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमों ने पांच ब्लॉक के 14 गांवों में हेल्थ कैंप लगाए। इस दौरान 648 लोगों की स्वास्थ्य जांच में 296 बुखार पीड़ित मिले। 394 लोगों की मलेरिया जांच भी की गई। गनीमत रही कि मलेरिया का कोई रोगी नहीं मिला। अगस्त में अब तक जिले में मलेरिया के 65 रोगी मिल चुके हैं। इनमें आठ फैल्सीपेरम मलेरिया के भी हैं। सबसे ज्यादा मलेरिया के 16 रोगी सालारपुर के गांव शेरगंज में मिले हैं। पिछले वर्ष भी इस गांव में मलेरिया और डेंगू का व्यापक प्रकोप रहा था।
शुक्रवार को लारपुर, दातागंज, जगत, बिल्सी, उझानी और समरेर ब्लॉक में कैंप लगाए गए। मलेरिया विभाग ने मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव भी किया। आठ गांव ऐसे हैं जहां मलेरिया तेजी से पैर पसार रहा है। दातागंज के चिंजरी, बिरिया डांडी, ढिलवारी, पापड़, सालारपुर के शेरगंज, भटौली, सिगोई,शकूरपुर, तकीपुर, बिल्सी के नगला कल्याण, भीकमपुर, मसूपुर, समरेर के कादराबाद, बिरियाडांडी आदि गांवों में इन दिनों वायरल फीवर का व्यापक प्रकोप है।
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दवाओं की कमी नहीं, 20 टीमें गठित, मलेरिया जांच धीमी
बदायूं। मच्छरजनित बीमारियों के अलावा बुखार, मलेरिया, डायरिया आदि से संबंधित दवाओं की स्वास्थ्य विभाग के पास कमी नहीं है। जिले में बुखार प्रभावित गांवों में कैंप करने के लिए 20 टीमों का गठन भी किया गया है। मलेरिया विभाग की ओर से भी दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। दूसरी ओर मलेरिया जांच धीमी होती जा रही है। दरअसल, मलेरिया जांच के लिए आशा वर्कर्स का भी सहयोग लिया जा रहा है, इसके बदले उनको भुगतान किया जा रहा है। काफी समय से आशा वर्कर्स का भुगतान न होने के कारण आशा वर्कर्स इन दिनों मलेरिया जांच पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही हैं। जिले को इस बार 3.70 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य दिया गया है। आशा वर्कर्स को एक जांच के लिए 15 रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन आशा वर्कर्स को समय से भुगतान ही नहीं मिल रहा। संवाद
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गंदगी और जलभराव के कारण गांवों में ज्यादा प्रकोप
बदायूं। गौर करने की बात यह है कि इस बार शहरी इलाकों में बुखार और मलेरिया का खास प्रकोप नहीं है, लेकिन गांवों को बुखार और मलेरिया के साथ संक्रामक रोग चपेट में ले रहे हैं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग ने जिन 253 गांवों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है वहां गंदगी, जलभराव के साथ जलकुंभी युक्त तालाब भी हैं। पंचायती राज विभाग की ओर से गांवों में सफाई के साथ तालाबों से जलकुंभी साफ कराने पर जोर नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत की ओर से सीडीओ और डीपीआरओ को पत्र भी लिखा गया है। कई गांवों में महीनों से सफाई नहीं हुई है। यहां सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच रहे हैं। संवाद
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बुखार प्रभावित गांवों में कैंप करने के लिए 20 टीमों को लगाया गया है। दवाओं की कोई कमी नहीं है। मलेरिया विभाग भी अपना काम कर रहा है। गत वर्षों के मुकाबले मलेरिया और संक्रामक रोग नियंत्रण में हैं। वायरल फीवर का प्रकोप जरूर है। कई गांवों में गंदगी के कारण भी बीमारियां फैल रही हैं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को लिखा गया है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ