कोर्ट में आरोपी पिता ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसने विवेचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह निर्दोष है। बाद में उसके भाई ने भी कोर्ट में यह बयान दिया कि उसे अपने भाई द्वारा उसकी बेटी के साथ गलत काम करने की कोई जानकारी नहीं है। वह इस बात से भी मुकर गया कि उसने कोई तहरीर या कोई बयान दिया था। हालांकि तहरीर पर अगूंठा लगाने की बात उसने स्वीकार की। जब कोर्ट में उससे पूछा गया कि उसने अभी तक अपने भाई को जेल में क्यों रखा तो उसने कहा कि उसके भाई ने कोई गलत काम नहीं किया। केवल जमीन के विवाद में वह उसे फंसाना चाहता था।
दूसरे भाई पर डाल दी तहरीर देने की बात
आरोपी पिता तीन भाई हैं। जिस भाई ने तहरीर दी थी, उसने इसे तीसरे भाई पर डाल दिया। उसने कहा कि उसका तीसरा भाई ही तहरीर टाइप कराकर लाया था, जिस पर उसने अंगूठा लगाने को कहा था तो उसने लगा दिया। उसका आरोपी भाई जमीन बेचने की बात कह रहा था तो उसने उसे फंसा दिया। हालांकि कोर्ट ने पीड़िता और उसके चाचा को पक्षद्रोही घोषित करते हुए आरोपी पिता को सजा सुना दी।