गांव का नक्शा होता तो नहीं भटकते किसान
उलाई खेड़ा गांव के किसानों का यह दुर्भाग्य है कि उनके गांव का नक्शा नहीं है। पांच साल पहले तत्कालीन भाजपा विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने किसानों का यह मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उनकी मांग पर गांव में चकबंदी कराने का भी आदेश हो गया था लेकिन नक्शा न होने की वजह से चकबंदी भी नहीं हो पाई। पिछले कई साल से राजस्व अधिकारी नक्शा निकलवाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों को आश्वासन भी दे रहे हैं कि लखनऊ से नक्शा निकलवाया जा रहा है लेकिन अभी तक नक्शा निकलकर सामने नहीं आया है।
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पिछले साल राजस्व विभाग ने कटवाई थी गेहूं की फसल
हर साल की तरह पिछले साल भी दबंग कंबाइन लेकर गेहूं की फसल कटवाने पहुंचे थे। वह करीब सौ-दो सौ बीघा गेहूं की फसल काट भी ले गए थे लेकिन तब तक पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों को उसकी सूचना मिली गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर और मौजूद रहकर कंबाइन से गेहूं कटवाए थे। सारा गेहूं सरकारी क्रय केंद्र पर भेजा गया। उसकी रकम ग्राम पंचायत के खाते में जमा कराई गई थी।
क्या बोले किसान
किसान सुभाष गुप्ता ने बताया कि इस जमीन को बीस साल हो गए तब से न तो जमीन मिली और न ही वह कभी उसमें फसल कर पाए तब से लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे। यह अच्छी बात है कि अब जमीन मिली है।
किसान रामवीर ने बताया कि यह केवल एक किसान का मामला नहीं है। करीब तीन-चार सौ किसानों का मामला है। हम लोग पिछले 20 साल से हक की लड़ाई लड़ रहे हैं तब से अब जाकर न्याय मिलने जा रहा है।
किसान डोरीलाल ने बताया कि पिछले साल राजस्व विभाग ने किसानों की सूची भी बनाई थी। करीब 100 किसानों के नाम भी लिखे गए थे लेकिन बाद में मामला रफादफा कर दिया गया। उसके बाद पता नहीं चला कि क्या हुआ।
किसान लाखन ने कहा कि 20 साल बाद किसानों को न्याय मिला है। अब जाकर कहीं किसानों को उनका हक मिल रहा है। अब कुछ ऐसा किया जाए कि दबंग दोबारा से कब्जा नहीं कर पाएं। अगर ऐसा हुआ तो बड़ा विवाद पैदा होगा।
नायब तहसीलदार अजीत यादव ने कहा कि हमारी टीम पिछले दो दिन से लगातार गांव जा रही है। जिन किसानों के नाम पट्टे हैं, उनके अनुसार जमीन पर कब्जा दिलवाया जा रहा है। अब यह क्रम लगातार चलेगा, जब तक सभी किसानों को उनके नाम की जमीन नहीं मिल जाती। अगर कोई हस्तक्षेप करेगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।