उझानी (बदायूं)। एक बार फिर बारिश की संभावना ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। पहले ही आलू की बेकदरी और फिर बेमौसम बारिश के साथ पछुवा हवा ने किसान को काफी नुकसान पहुंचाया है लेकिन कृषि विभाग के अफसर मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करने के बजाय दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं। लगातार फसलों को हो रहे नुकसान की स्थिति देखकर किसान को आय दोगुनी होने की उम्मीद तो दूर लागत निकलती भी नहीं दिख रही।
बारिश और ओलावृष्टि की आशंका अब भी बनी हुई है। दो दिन पहले ही मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की थी कि एक-दो दिन में तेज बारिश हो सकती है। बेमौसम बारिश से पहले ही फसलों को काफी नुकसान हो चुका है। किसानों के मुताबिक गेहूं की करीब 50 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है लेकिन प्रशासन बगैर मौका मुआयना किए ही सिर्फ अंदाजे से नाममात्र का नुकसान बता रहा है। सब्जी फसलों में तोरई, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और पत्तीदार सब्जियां भी बर्बाद हो गई हैं।
नुकसान को लेकर कृषि विभाग के अफसरों और किसानों के दावों में जमीन-आसमान के अंतर है। गांव फतेहपुर निवासी हरिओम ने बताया कि नुकसान का वास्तविक आकलन करने के लिए अफसर अपने दफ्तरों से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। अफसर अगर मौका मुआयना कर नुकसान का मुआवजा तय करें तो कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। दरअसल, गेहूं की एक बीघा फसल पर बीज, सिंचाई, उर्वरक के रूप में करीब तीन हजार रुपये की लागत आती है। ऐसे में पैदावार प्रभावित होने पर लागत भी नहीं निकल पाती।
मटर की फसल सड़ती देख बनाया पशुओं का चारा
- गद्दीटोला मोहल्ले के रफीक ने तीन बीघा खेत बटाई पर लेकर मटर की फसल की थी। पिछले दिनों बारिश के दौरान खेत में पानी भर गया। पानी निकास की व्यवस्था नहीं होने की वजह से मटर के पौधे और फल सड़ने लग गए। रफीक ने बताया कि खेत में सड़ने से बची फसल अब पशुओं को खिला रहे हैं। खेत खाली होने के बाद मक्का बोआई कर देंगे। नसरूल्लापुर के रामसिंह के पांच बीघा खेत में मक्का की अगेती फसल को काफी नुकसान हुआ है।
वर्जन
- फसलों को नुकसान तो हुआ है, लेकिन उसका सही आकलन कृषि विभाग की टीम सर्वे के दौरान ही करती है। गेहूं और मटर का नुकसान ज्यादा हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं खेतों में हुआ है, जहां से बारिश के पानी के निकास का प्रबंध करने में किसान नाकाम हो गए थे। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
- किसान बोले- नुकसान के हिसाब से नहीं मिलता मुआवजा
फोटो- 25 बीडीएनयूजेएचपीएच-03
बारिश के दौरान सब्जी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। सब्जी फसलों की लागत में काफी खर्चा हो जाता है लेकिन नुकसान के हिसाब से मुआवजा नहीं मिल पाता। मुआवजा तय करते समय हकीकत पर गौर करना चाहिए। - अफजाल, गद्दीटोला
फोटो- 25 बीडीएनयूजेएचपीएच-04
- गेहूं की फसल आधे से ज्यादा तबाह हो चुकी है। आलू ने पहले ही जेब खाली कर दी थी। गेहूं से उम्मीद बंधी लेकिन बारिश और तेज हवा ने उसे भी नहीं बख्शा। घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए साहूकारों के सामने हाथ फैलाने पड़ेंगे। - प्यारे लाल, अढौली
फोटो- 25 बीडीएनयूजेएचपीएच-05
बेमौसम बारिश से गेहूं और सरसों की फसल काे नुकसान हुआ है। कटरी इलाके ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। फिर भी सरकार की ओर से मुआवजा तय करने में मनमानी की जा रही है। मुआवजा नुकसान के अनुरूप तय होना चाहिए। - हरेंद्र सिंह, कुआडांडा
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मौसम की मार सबसे ज्यादा किसानों पर ही पड़ती है। पिछले सालों में सरसों और मक्का पर बारिश की मार पड़ी थी। लागत भी नहीं निकल पाई थी। अब गेहूं देखकर लगा कि घर-आंगन अन्न से भर जाएगा, लेकिन कुदरत के आगे अरमान अधूरे रह गए। - मैकूलाल, ननाखेड़ा
खेत में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
खेत में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
खेत में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
खेत में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
खेत में गिरी गेहूं की फसल। संवाद