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भोले के प्रसाद में श्रद्धा अपार..भंडारों पर खर्च एक करोड़ के पार

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उझानी (बदायूं)। सावन महीने में जलाभिषेक का तीसरा पड़ाव पूरा होने से पहले कांवड़ियों के सेवा-सत्कार के साथ लजीज व्यंजन खिलाने के लिए शिवभक्त दिल खोलकर खर्चा कर रहे हैं। कछला घाट से लेकर बरेली-मथुरा हाईवे पर सौ से अधिक स्थानों पर भंडारों में कांवड़ियों के जायके के अनुरूप व्यंजन बनवाए जा रहे हैं।
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सब्जी-पूडी, खीर, पुलाव, छोले-चावल ही नहीं, हलुवा और पकौड़ी भी गरमागरम खिलाई जा रही हैं। कांवड़ियों ने अगर मुंह मोड़ा तो सेवादार यही कहते नजर आए कि भोले कुछ तो खा लीजिए। कांवड़ियों की सेवा में भंडारों पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्चा किए जाने का अनुमान है। भंडारों की शुरूआत यूं तो कांवड़ यात्रा के आगाज के साथ ही हो गई, लेकिन शुरूआती दौर में फिलहाल जैसे नजारे देखने को बहुत कम ही मिले। भंडारे पिछले दोनों रविवार को भी हुए थे। गंगाघाट से हाईवे पर कदम रखते ही कांवड़ियों और भंडारों के अलावा कुछ नजर नहीं आया। मेन मार्केट में प्राइवेट बस स्टैंड के पास पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल और पालिकाध्यक्ष पूनम अग्रवाल के साथ सेवादारों ने कांवड़ियों को रोककर उनकी पसंद के व्यंजन खिलाए।
मंडी गेट, घंटाघर चौराहे और पंजाबी कालोनी मोड़ के पास भी सब्जी-पूड़ी वितरित की गईं। जजपुरा मंदिर के पास मुकेश शर्मा, विजय गुप्ता और रवि प्रताप सिंह ने दिल खोलकर कांवड़ियों का सत्कार किया। मंदिर के दूसरे छोर पर विजय साहू, ओमेंद्र गुप्ता आदि के भंडारे में शादियों जैसे व्यंजन बनवाए गए। बाईपास पर पालिका सदस्य अरुण अग्रवाल और सचिन अग्रवाल ने भी भंडारा कराया। ऐसा कोई प्रमुख स्थान और मंदिरों के आसपास का इलाका खाली नजर नहीं आया, जहां सेवा में कसर छोड़ी गई हो। सेवादार की भूमिका में दिखे उदय सिंघल और नीरज माहेश्वरी की मानें तो 25 शिवभक्तों ने खुद ही अपने भंडारे पर डेढ़ से दो लाख रुपये तक खर्च किए। 50 हजार और एक लाख के खर्चे वाले भंडारे तो अनगिनत हुए हैं। शिवभक्त राजकुमार शर्मा ने बताया कि भंडारे स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से कराते हुए कांवड़ियों की पसंद का पूरा ख्याल रखा है।
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सिटी मजिस्ट्रेट ने दी 30 भंडारों को अनुमति
कांवड़ियों के सेवा-सत्कार के लिए रविवार को भंडारे तमाम स्थानों पर हुए लेकिन अनुमति करीब 30 स्थानों पर भंडारे को मिली। सिटी मजिस्ट्रेट ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन भी इतने ही आए थे। आयोजकों को इस हिदायत के साथ अनुमति दी गई कि सड़क से 20 फीट दूर प्रसाद वितरित करेंगे। किसी भी सूरत में कांवड़ियों का आवागमन प्रभावित नहीं होना चाहिए। भंडारे में खानपान के सामान की शुद्धता का विशेष ख्याल रखना होगा। अधिकतर आयोजकों ने अनुमति लेना उचित भी नहीं समझा।
जायकेदार थी पकौड़ी, हलुवा भी मजेदार
पुरानी अनाज मंडी के पास भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के बाद कांवड़ियों ने चाय की चुस्की ली। पकौड़ी खाते हुए बिनावर के गांव चंदौरा निवासी राजकुमार ने बताया कि कांवड़ियों की सेवा में शिवभक्तों ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। रास्ते में उसे आठ-नौ स्थानों पर रोका गया। कोई कितना खा लेगा लेकिन सेवाभाव के आगे उन्हें कुछ न कुछ ग्रहण करना पड़ता है। पकौड़ी जायकेदार तो हलुवा ने मन प्रसन्न कर दिया।
चलो अब, लस्सी का आनंद लें
कांवड़ियों की टोली में शामिल घटपुरी निवासी शिवम कुमार ने कांवड़ यात्रा के दौरान खानपान के पांच-छह स्टाल पर अलग-अलग व्यंजनों का जायका लिया। कहीं एक पूड़ी तो कहीं ब्रेड पकौड़ा खाया। छोले-चावल का दोना देख उसने लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद सेवादार लस्सी का गिलास लेकर आया तो उसने गला तर कर लिया। शिवम ने बताया कि रास्ते में मटर-पनीर के साथ पूड़ी भी बांटी गईं।
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