बदायूं। चार साल बाद भी जेल के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो सका है। जेल प्रशासन से लेकर प्रशासन के अधिकारी दो किसानों को मना नहीं सके हैं।
नई जेल के निर्माण को करीब नौ साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। छह साल पहले मंजूरी मिली तो दो साल तो विभाग जमीन तलाशने में ही लगा रहा। बहेड़ी के पास जेल के लिए जमीन मिली तो प्रशासन ने किसानों से बैनामे कराने शुरू कर दिए। इसी बीच दो किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कर दिया। चार साल से मामला कोर्ट में लंबित है। इससे जेल का निर्माण अटका हुआ है।
जिला जेल में इस समय 625 की क्षमता के विपरीत 1048 बंदी-कैदी हैं। क्षमता से ज्यादा बंदी और कैदी होने की वजह से नई जेल के निर्माण को मंजूरी मिली तो शहर से सटे गांव बहेड़ी के पास जमीन चिह्नित की गई। किसानों की जमीनों के बैनामे की प्रक्रिया शुरू की गई तो 14 किसानों ने जमीन को लेकर विरोध दर्ज कराया।
इसके बाद प्रशासन ने लगातार पैरवी करते हुए 12 मामलों का निस्तारण करा दिया, लेकिन दो किसानों के कोर्ट चले जाने से पेच फंस गया। अब प्रशासन की ओर से इन मामलों का निस्तारण कराने की पहल भी नहीं की जा रही, क्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। शासन इसका संज्ञान लेकर कोर्ट में पैरवी करे, तभी जेल का निर्माण हो सकेगा।
अभी कोर्ट से कोई निर्णय नहीं हो सका है। किसानों से बात भी की गई है। कोर्ट के फैसले पर ही बात बनेगी। बाकी जमीन पर भी निर्माण शुरू नहीं कराया जा सकता, क्योंकि दोनों किसानों की जमीन बीच में फंसी हुई है। जल्द ही निर्णय होने की संभावना है, इसके बाद ही नई जेल का निर्माण शुरू हो सकेगा। -राजेंद्र कुमार, जेल अधीक्षक