कछला में गंगा में गहराई वाले स्थानों पर लगाए गए संकेतक। संवाद
उझानी। कछला घाट को पक्का करने के एस्टीमेट फाइलों में कैद हैं और श्रद्धालु आज भी कच्चे घाट पर जान जोखिम में डालकर स्नान करते हैं। कछला में घाट समेत आसपास के इलाके में सौंदर्यीकरण की कवायद वर्ष-2014 में शुरू हुई थी, जो आज तक सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गई है।
ऐसा भी नहीं कि राजनीतिक स्तर से मजबूत तरीके से पहल नहीं की गई। पिछले साल केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह से भेंटकर 19 करोड़ रुपये स्वीकृत भी करा दिए थे, लेकिन पुराने एस्टीमेट में दिक्कतों की वजह से नगर पंचायत की डीपीआर स्वीकार नहीं हुई। नई डीपीआर भेजी गई, जो इन दिनों लखनऊ में पर्यटन विभाग के पास लंबित है।
हरिद्वार के घाटों की तर्ज पर कछला गंगाघाट के सौंदर्यीकरण के दावों की हकीकत पर गौर करें तो जब जलशक्ति मंत्री धर्मपाल सिंह थे तो उन्होंने भी नगर पंचायत कछला के वर्ष-2014 में भेजे गए एस्टीमेट को आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया था।
पिछले साल अगस्त में केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह से लखनऊ में भेंटकर कछला घाट के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव सौंपा था। इसके तहत पक्के घाट, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण से जुड़े अन्य कार्य होने थे। कार्रवाई आगे बढ़ी तो फिर लोकसभा चुनाव आ गए।
कछला नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि चुनाव आते ही सभी प्रस्ताव अटक गए थे। उनके मुताबिक सबसे पहले 51 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, उस पर भी केंद्रीय मंत्री और प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री के बीच चर्चा हुई थी। इसके बाद ही नगर पंचायत से संशोधित डीपीआर भी मांगी गई, जो प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय को भेजी जा चुकी है।