बदायूं। दस लाख रुपये खर्च करने के बाद भी जिला अस्पताल में बिजली को लेकर हाहाकार है। रविवार सुबह करीब नौ बजे अचानक बिजली गुल हो गई। इस दौरान वार्डों में भर्ती मरीज उमस भरी गर्मी में परेशान हो गए। अवकाश होने की वजह से खून की जांच और एक्सरे कराने वाले मरीज नहीं थे। भर्ती मरीजों के तीमारदार हाथ के पंखे से पसीना सुखा रहे थे। वहीं, तमाम तीमारदार पेड़ की छांव में जाकर बैठ गए।
जिला अस्पताल में बिजली व्यवस्था ठीक रहे इसके लिए परिसर में ही सब स्टेशन बनाया गया था। करीब चार माह पहले 33 केवीए की लाइन जल गई थी। इससे हर रोज 10-10 घंटे बिजली गुल रहना आमबात हो गई थी। इसको लेकर शासन तक मामला पहुंचा। एस्टीमेट बनाकर भेजा गया। दस लाख खपाने के बाद भी बिजली की आंख मिचौनी बंद नहीं हुई।
रविवार सुबह करीब नौ बजे अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई। वार्डों में अंधेरा छा गया। मरीज उमस भरी गर्मी से बेहाल होने लगे। कुछ तो बाहर हवा में जाकर बैठ गए तो कुछ वार्ड में ही रहे। तीमारदारों ने हाथ का पंखा झलकर मरीजों को राहत दी। दो बजे तक वार्डों में भर्ती मरीज व तीमारदार बेहाल दिखे।
पांच घंटे से बच्चे पर झल रहे पंखा
चार दिन पहले बेटे विनय प्रताप को चोट लगने पर जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया है। रविवार सुबह करीब नौ बजे बिजली गई है तो फिर आने का नाम ही नहीं लिया। पांच घंटे से बच्चे पर पंखा झल रहे हैं। आधे वार्ड के मरीज तो गर्मी के चलते बाहर हवा में पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए हैं। - सोहन सिंह, गढ़ा, दातागंज
कर्मचारी नहीं सुनते तीमारदारों की बात
तीन दिन पहले भाई शोएब का एक्सीडेंट हो गया था। उसे शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। रविवार की सुबह से ही बिजली नहीं है। अब ऐसे में मरीज बेचैन हैं। यहां कोई देखभाल करने वाला भी नहीं है। चाहे कोई भी समस्या हो कर्मचारी सुनने को राजी नहीं होते। - आजम, उसहैत
जिला अस्पताल के सब स्टेशन की लाइन में दिक्कत आने से बिजली आपूर्ति बंद की गई थी, जो दोपहर बाद शुरू कर दी गई। इसके लिए कर्मचारी सुबह से ही लगा दिए गए थे। मरीजों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल बदायूं
हाथ से पंखा झलकर हवा करती महिला तीमारदार। संवाद