डीएम रोड पर सुभाष चंद्र की आटा चक्की है। इसी से यह अपने परिवार का संचालन करते हैं। इन पर बिजली का 30563 बकाया था। एकमुश्त समाधान के बाद कैंप में मौजूद अधिकारियों ने 1000 रुपये ओटीएस का शुल्क जमाकर शेष 29206 जमा करने का निर्देश मिला। सुभाष ने बताया है कि उसने 1300 चेक से 16206 नकद और 1000 ओटीएस के मिलाकर विभाग का उसके ऊपर कुछ नहीं रह गया था। बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर एकमुश्त का समाधान का समायोजन नहीं होने दिया। पिछले बकाया बिल में 1300 की धनराशि समायोजित नहीं की। जब इस संबंध में सुभाष ने तत्कालीन एक्सईएन से शिकायत की जो उससे दो हजार रुपये अतिरिक्त जमा करने का फरमान सुना दिया। वह धनराशि नहीं दे सका तो उसके तीनों फेस काट दिए। मुकदमा दर्ज करने और जेल भिजवाने की धमकी भी दी। जान से मारने की धमकी मिली तो उसने कोर्ट की शरण ली। उसके पक्ष में फै सले आने पर बिजली अधिकारियों को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है। अपने से संबंधित दो बिंदुओं पर सुभाष ने तत्कालीन एक्सईएन बिजली से सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगी। राज्य आयुक्त तक पहुंचे बिजली विभाग ने कोई तारीख नहीं की तो एक्सईएन पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदंड किया गया, जिसकी सीमा 25000 रुपये थी। समय सीमा पूरी होने पर राज्य आयुक्त ने डीएम को निर्देशित किया है कि तत्कालीन जनसूचना अधिकारी से 25000 रुपये की वसूली की जाए।