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सिर पर धूप...अब पढ़ाई करें या पसीना पोछें

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उझानी में जाकिर हुसैन विद्यालय का क्षतिग्रस्त मेनगेट। संवाद - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार और बेहतर माहौल बनाने के लिए सरकार की ओर से कई ऐसी योजनाएं संचालित हैं, जिनके अमल में आने के बाद कुछ विद्यालय कॉन्वेंट स्कूलों को भी मात देते नजर आ जाते हैं। पर, जिन विद्यालयों की दीवारें ढह चुकी हैं या फिर छतें गिरताऊ हैं, उस तरफ किसी की नजर नहीं जाती। ऐसी स्थिति यहां कई स्कूलों की देखी जा सकती है। स्थिति इतनी खराब है कि भीषण गर्मी के दौरान खुले में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर बच्चों की नजर किताब पर तो होती है लेकिन हाथ पसीने से सराबोर चेहरे को बार-बार पोंछने को विवश हो जाते हैं।
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ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में नरऊ के भवन की हालत बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से भी छिपी नहीं है। चार कमरों वाले विद्यालय में दो की हालत काफी खराब है। पिछले शैक्षिक सत्र में दीवारें दरकीं और छत से प्लास्टर छूटकर गिरने लगा तो दरवाजे पर ताला लटका दिया गया। नगरीय विद्यालयों में डॉ. जाकिर हुसैन प्राथमिक विद्यालय का एक भी कमरा सुरक्षित नहीं है। बच्चे खुले में पढ़ते हैं। मेनगेट के पास ही पिछले दिनों दीवार भी ढह गई। प्रधानाध्यापक नीरज सक्सेना को लगा कि अंदर से कोई सामान उठा ले जाएगा, सो उन्होंने मलबे में से ईंटें निकालकर ऐसे ही चुन डाला।
नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर से सटे सरोजनी नायडू विद्यालय के दो कमरों की छत गिर चुकी है। मलबा भी अंदर ही पड़ा है। तीन कमरों में कक्षा एक से आठ तक बच्चे कैसे पढ़ पाते हैं, यह तो शिक्षकों के सिवाय कोई और नहीं बता सकता। चूंकि बारिश का मौसम है। कीड़े-मकोड़े भी मलबे से बाहर निकल आते हैं। सबसे ज्यादा खतरा दीवारों में दरार पड़ जाने से बना हुआ है। एक बच्चे के अभिभावक नेत्रपाल ने कहा कि हर समय डर बना रहता है।
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इन विद्यालयों के ध्वस्तीकरण का हो चुका है आदेश
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पिछले महीने उझानी ब्लॉक और नगरीय क्षेत्र में जिन विद्यालयों की हालत जर्जर बताते हुए उन्हें ध्वस्त किए जाने का आदेश किया गया, उनकी संख्या एक दर्जन से अधिक है। प्राथमिक विद्यालयों में जिरौली, कुरऊ, सैजनी, रनऊ, नसरूल्लापुर, धौरेरा, अल्लीपुर मढैय्या, नगर के जाकिर हुसैन, सरोजनी नायडू, दयानंद, कस्तूरबा गांधी, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संजरपुर, अब्दुल्लागंज और भरकुइया शामिल है। विभागीय सूची के विपरीत भी कई ऐसे विद्यालय हैं, जिनकी स्थिति अच्छी नहीं है।
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बच्चों को टिनशेड में पढ़ाती मिलीं प्रधानाध्यापिका
प्राथमिक विद्यालय नरऊ की प्रधानाध्यापिका रितु अग्रवाल शिक्षिकाओं के साथ बच्चों को टिनशेड में बैठाकर पढ़ाती मिलीं। कक्षा एक से पांच तक बच्चे दो कमरे में बैठकर एक साथ पढ़ाई नहीं कर सकते, सो वह बच्चों को उस स्थान पर बैठाकर पढ़ाती हैं, जहां उन्हें मिड-डे मील खाना खिलाया जाता है। खास बात तो यह कि टिन शेड डेढ़ साल में भी पूरी तरह दुरस्त नहीं हो पाया है। धूप आ जाए तो बच्चे पेड़ के नीचे बैठा दिए जाते हैं। यहां दो दिन पहले हैंडपंप खराब हुआ तो मिड-डे मील भी नहीं बन पाया था।
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ये भी जानिए
- कुल विद्यालय- 171
- जर्जर विद्यालय-17
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विद्यालयों का चिह्नीकरण कराया गया है। उझानी क्षेत्र में करीब 17 विद्यालय जर्जर है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी गई हैं।
-शशांक शुक्ला, बीईओ उझानी

उझानी में खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करते बच्चे। संवाद- फोटो : BADAUN

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