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Budaun News: बारिश से अगेती मक्का के उत्पादक परेशान

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उझानी में कटाई के इंतजर में मक्का की फसल। सवाद
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उझानी। तीन-चार दिन से हो रही बारिश से अगेती मक्का के उत्पादक परेशान हैं। गहाई पर ब्रेक तो मौसम का मिजाज बिगड़ने के साथ ही लग गया था। अब बारिश थम रही है न ही फिलहाल धूप खिलने के आसार नजर आ रहे हैं। चार-छह दिन और ऐसा ही चला तो बारिश में किसानों के अरमान भी बह जाएंगे।
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पिछले तीन- चार सालों में किसानों का अगेती मक्का की ओर तेजी से रुझान बढ़ा है। इसी का नतीजा है कि इस बार रकबा में पिछले साल के मुकाबले वृद्धि हुई है। शुरू में मौसम का मिजाज ठीक रहा तो फसल सही ढंग से पककर तैयार हो गई। करीब 65 फीसदी उत्पादकों ने समय रहते गहाई करके उसे बाजार में पहुंचा दिया, लेकिन बारिश ने उत्पादकों का ऐसा खेल बिगाड़ा कि मौसम में नमी के बाद भी उनका हलक सूख रहा है। मक्का उत्पादकों में पटपरागंज निवासी जगदीश सिंह बताते हैं कि इलाके में अब भी करीब 30 फीसदी रकबा में फसल खेतों में ही खड़ी है। बारिश शुरू होने से एक-दो दिन पहले जिसने भी गहाई करा ली, उन्हें मक्का सुखाने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
मक्का पर मौसम की मार झेल रहे उत्पादकों में फुलासी के किसान चंद्रसेन कहते हैं कि उन्होंने 10 बीघा में मक्का की है। फिलहाल, फसल खेत में खड़ी है, बारिश नहीं थमने से दाने सड़ जाने का अंदेशा है। अधिक बारिश से पैदावार प्रभावित होगी। मक्का बेचकर घरेलू जरूरतें पूरी कर लेने के जो अरमान थे, वह अब पूरे होते नजर नहीं आ रहे। कई और उत्पादक ऐसे भी होंगे, जिन्होंने बच्चों की फीस जमा करने से लेकर केसीसी का बकाया जमा करने या फिर किसी का उधार चुकाने को वादा किया होगा, वह भी निराशा के साए में हैं। प्रगतिशील किसानों में अभिमन्यु प्रताप सिंह बताते हैं कि मौसम की वजह से किसान दिक्कत में है। मक्का उत्पादकों की नींद उड़ गई है।
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ऐसे करो तो नुकसान कम फायदा अधिक
अगेती मक्का उत्पादन से जुड़े इलाके के बड़े किसानों में अहीरटोला मोहल्ला निवासी आर्येंद्र यादव ने अच्छी पैदावार का गणित भी समझाया। बोले- अगेती मक्का की फसल तभी अच्छी पैदावार देगी, जब फरवरी आखिर तक बोआई कर दी जाए। लागत प्रति बीघा करीब पांच हजार रुपये जरूर आ सकती है, लेकिन पैदावार प्रति बीघा करीब आठ क्विंटल रहेगी। अगेती हाइब्रिड मक्का 90 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती है। बाजार भाव दो हजार रुपये क्विंटल का भी मिला तो भी मुनाफा कम नहीं होगा। मार्च के आखिर या फिर अप्रैल शुरू में मक्का की बोआई करने वालों को जब फसल काटनी होती है तो बारिश का सामान करना पड़ता है। यही नुकसान की बड़ी वजह है।

मक्का की अगेती फसल को बारिश ने फिलहाल नुकसान पहुंचाया है। जहां भी फसल पकी खड़ी है, उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी। जिन किसानों ने गहाई करा ली है, वह मक्का का ढेर नहीं लाएं। बारिश से बचाते हुए बड़े टिनशेड या फिर सुरक्षित स्थानों पर फैला दें तो दाने काले नहीं पड़ेंगे।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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