इनमें पप्पू का परिवार बेहद गरीब था। शव का अंतिम संस्कार करने तक के उनके पास पैसे नहीं थे। जब उनके रिश्तेदारों और परिवार वालों ने यह बात सुनी तो उन्होंने किसी तरह वीडियोग्राफर के लिए रुपयों का इंतजाम किया। ऐसे में करीब चार घंटे बाद पप्पू के शव का पोस्टमार्टम हो सका। इसी प्रकार अयोध्या प्रसाद के शव का पोस्टमार्टम भी वीडियोग्राफी होने पर ही हो सका। दोनों परिवारों को 3500-3500 रुपये वीडियोग्राफर को देने पड़े।
प्रभारी सीएमओ डॉ. अब्दुल सलाम ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। वैसे तो वीडियोग्राफी पुलिस की ओर से कराई जाती है। उसके पैसे कौन देता है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। अगर रुपये परिवार वालों से लिए जा रहे हैं तो यह गलत है। इस बारे में अधिकारियों से बात करेंगे।
सीओ सिटी आलोक मिश्रा ने कहा कि हर मामले में वीडियोग्राफी नहीं कराई जाती। यह नियम वर्षों से चला आ रहा है। जो मामले ज्यादा संवेदनशील होते हैं उनमें ही वीडियोग्राफी कराई जाती है। हम इस संबंध में जानकारी करेंगे।