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Budaun News: ब्लॉक परिसर के कमरे में सफाई कर्मी का शव मिला

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मृतक इरशाद सैफी। फाइल फोटो
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- दो दिन से लापता इरशाद सैफी इटौआ गांव में थे तैनात
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- सुसाइड नोट में लिखा- रिश्तेदार ने नहीं लौटाए रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी (बदायूं)। दो दिन से लापता इटौआ गांव में तैनात सफाई कर्मी इरशाद सैफी का शव बुधवार शाम ब्लॉक के नवनिर्मित कमरे में पंखे से लटका मिला। मृतक के दोनों पैर जमीन से सटे देख परिजन सकते में पड़ गए। मृतक की पैंट की जेब से एक सुसाइड नोट भी पुलिस को मिला। इसमें इरशाद ने रिश्तेदार पर 12.50 लाख रुपये नहीं लौटाने और परिवार से माफी मांगने का जिक्र किया है।
अयोध्यागंज मोहल्ले में रहने वाले सफाई कर्मी इरशाद (40) पुत्र रियाजुद्दीन दो दिन से घर नहीं पहुंचे थे। पत्नी ने जब इसकी जानकारी दूसरे मोहल्ले में रहने वाले परिवार के लोगों को दी तो भाई फय्याज ने बुधवार दोपहर कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके करीब एक घंटे बाद किसी कर्मचारी ने ब्लॉक के नवनिर्मित कमरे के बरामदे में इरशाद का शव पंखे से लटका देखा तो मौके पर लोगों की भीड़ लग गई।
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ब्लॉक प्रमुख शिशुपाल सिंह शाक्य ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने मौका मुआयना किया को फोरेंसिक टीम ने नमूने लिए। इसके बाद शव फंदे से नीचे उतारा गया। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मृतक की पैंट की जेब में निकले सुसाइड नोट में शेखूपुर निवासी रिश्तेदार पर 12.5 लाख रुपये बकाया बताए गए हैं। वह रुपये नहीं लौटा रहा था।
इसके अलावा आत्महत्या के लिए परिवार से माफी मांगने का जिक्र भी किया गया है। इसके विपरीत, मौके पर जुटे लोग मृतक के पैर बरामदे के फर्श से सटकर झुके देख तमाम तरह के कयास लगाते नजर आए।
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सवालों से घिरी सफाई कर्मी की मौत
ब्लॉक कार्यालय के नवनिर्मित कमरे में सफाई कर्मी इरशाद का शव मिलने के बाद के हालात सामान्य नजर नहीं आए। शव के पास जो कुर्सी रखी थी, वह ब्लॉक कार्यालय की है। मान भी लें कि कुर्सी इरशाद ही उठा ले गए होंगे, तो फिर लापता होने की जानकारी होने के बाद भी किसी की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी। उनकी मौत भी मंगलवार देर रात या फिर बुधवार सुबह के आसपास होनी बताई जा रही है।
सफाई कर्मी इरशाद सैफी की तैनाती भले ही इटौआ गांव में है, लेकिन ब्लॉक के कर्मचारी और अधिकतर प्रधान और बीडीसी उन्हें अच्छी तरह से जानते थे। ऐसे में वह एक दिन पहले शाम को या फिर सुबह कार्यालय से कुर्सी लेकर उठाकर निकल गए और किसी की नजर नहीं पड़ी, यह मौके पर जुटे लोगों के गले नहीं उतर पा रही।
इरशाद का शव नवनिर्मित कमरे के बरामदे में जहां पंखे से लटका मिला, उसके पास ही कुर्सी रखी थी। बाहरी छोर के मुख्य कमरे के दोनों दरवाजे भी खुले थे। नए आवास का पिछला दरवाजा जरूर बंद था। बता दें कि इसी से सटा आंगनबाड़ी का कार्यालय है। कार्यालय में कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा रहता है। मृतक के छोटे भाई इश्त्याक ने कहा कि फिलहाल कुछ समझ में नहीं आ रहा है। एक ओर सुसाइड नोट तो दूसरी तरफ शव के आसपास के हालात। उन्होंने परिवार में किसी तरह की कलह होने से भी इन्कार किया।
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ब्लॉक प्रमुख के करीबी थे इरशाद
इरशाद सैफी भले ही इटौआ में सफाई कर्मी थे, लेकिन शिशुपाल सिंह शाक्य के ब्लॉक प्रमुख चुने जाने के बाद उनके भी काफी करीब आ गए थे। ब्लॉक प्रमुख भी इटौआ के निवासी है। इरशाद की आर्थिक स्थिति भी ठीक थी। बता दें कि तीनों अन्य भाइयों का अपना निजी व्यापार है तो इरशाद के दोनों बेटे दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं।
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अपने नाम से ऋण कराकर रिश्तेदार को दे दिए थे रुपये
सुसाइड नोट मिलने के बाद परिवार के लोगों ने परिचितों को बताया कि सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के शेखूपुर गांव में उनके एक रिश्तेदार रहते हैं। रिश्तेदार को व्यवसायिक कामकाज से रुपयों की जरूरत थी, इस पर उन्होंने इरशाद को अपनी परेशानी बताई। इरशाद ने बैंक ऑफ बड़ौदा से अपने नाम से ऋण कराया और रुपये रिश्तेदार को दे दिए थे। इसके बाद इरशाद ने जब रुपये मांगे तो वह टालमटोल करने लगा। इससे भी वह तनाव में थे।

मृतक इरशाद सैफी। फाइल फोटो

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