रूट डायवर्जन के कारण रोडवेज बसों में घटे 50 प्रतिशत यात्री, डीजल का खर्चा भी बढ़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सावन में रूट डायवर्जन के कारण परिवहन निगम की आमदनी पर काफी असर पड़ा है। यात्रियों की संख्या घटकर 50 फीसदी रह गई है। इससे परिवहन निगम को रोजाना करीब 10 से 15 लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
परिवहन निगम के पास 109 सरकारी और 43 अनुबंधित बसें हैं। उनमें करीब 10-15 बसें रोजाना वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। ऐसे में करीब 130-135 बसें ही चलती हैं। जहां आम दिनों में रोडवेज बसों में लोड फैक्टर करीब 75-78 फीसदी तक पहुंच रहा था और 25-26 लाख रुपये कलेक्शन हो रहा था, वहीं रूट डायवर्जन के कारण लोड फैक्टर घटकर 20 से 25 फीसदी तक रह गया है।
परिवहन निगम के अनुसार यह सबसे निचला स्तर माना जाता है। यात्रियों की बात करें तो पहले रोजाना 2500 से लेकर 3000 यात्री रोडवेज बसों में सफर कर रहे थे। अब यह संख्या घटकर 1000 से लेकर 1100 तक रह गई है। हालात यह हो गए हैं कि रोजाना 10 से 12 लाख रुपये ही जमा हो पा रहे है। ऊपर से रोडवेज बसों का खर्चा बढ़ गया है।
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करीब 40 फीसदी बढ़ा रोडवेज बसों का किराया
जहां यात्रियों की संख्या घटी है तो बसों का किराया बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक वैसे बदायूं से बरेली का किराया 76 रुपये है लेकिन रूट डायवर्जन के कारण बसों का किराया बढ़ाकर 137 से लेकर 150 रुपये कर दिया गया है। ऐसे में जब बसें कुंवरगांव, आंवला होते हुए बरेली पहुंचेंगी तो यात्रियों को 137 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। अगर बस दातागंज होते हुए बरेली जाएंगी तो किराया बढ़कर 150 तक देना पड़ेगा। इसी तरह दिल्ली का किराया अब तक 363 रुपये था लेकिन रूट डायवर्जन के बाद किराया 411 रुपये हो गया है। इसी तरह अन्य रूटों पर भी किराया बढ़ा है। बावजूद इसके आय में वृद्धि नहीं हो पा रही है।
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करीब 40 फीसदी बढ़ा डीजल का खर्चा
आमदिनों में जिन रोडवेज बसों में करीब सौ लीटर डीजल खर्च हो रहा था। इस समय उनमें 140 से लेकर 150 लीटर डीजल रोजाना खर्च हो रहा है। अनुमानित तौर पर करीब 40 फीसदी से ज्यादा डीजल खर्च बढ़ा है।
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परिवहन निगम को तीन दिन ज्यादा नुकसान
जिले में मुख्य रूप से तीन दिन रूट डायवर्जन लागू किया जाता है। शनिवार से लेकर सोमवार तक रोडवेज बसों काे रूट डायवर्जन के अनुसार निकालना पड़ता है। इन तीन दिन रोडवेज बसों में यात्रियों का टोटा रहता है। बहुत से यात्री रोड बंद होने के भय ही घरों से नहीं निकलते हैं तो तमाम यात्री रूट लंबा होने के कारण निजी वाहनों से सफर कर रहे हैं।
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श्रावण मास में परिवहन निगम को बहुत नुकसान हो रहा है। जहां पहले रोडवेज बसों से 25-26 लाख रुपये का कलेक्शन हो रहा था। वहीं अब 10-12 लाख रुपये का कलेक्शन हो रहा है। रूट डायवर्जन की वजह से रोडवेज बसों को ज्यादा किलोमीटर भी चलना पड़ रहा है। इससे परिवहन निगम को रोजाना करीब 15 लाख का नुकसान हो रहा है।
- धणेंद्र कुमार चौबे, एआरएम परिवहन निगम