उन्होंने कहा कि भगवान की बाल लीलाओं को देखकर गोपियां भगवान से प्रार्थना करती हैं। हे प्रभु, आप हमारे घर भी पधारें हमारे घर में ऊधम मचाएं और हमारी मटकियों को फोड़ें और हम चोर-चोर कहते हुए आपके पीछे भागें। इसके बाद उन्होंने कहा कि क्रोध की अवस्था में व्यक्ति की स्मृति नष्ट हो जाती है।
बिल्सी। ज्वाला प्रसाद जैन बाल निकेतन स्कूल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास स्वामी रामचंद्राचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया।
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उन्होंने कहा कि भगवान की बाल लीलाओं को देखकर गोपियां भगवान से प्रार्थना करती हैं। हे प्रभु, आप हमारे घर भी पधारें हमारे घर में ऊधम मचाएं और हमारी मटकियों को फोड़ें और हम चोर-चोर कहते हुए आपके पीछे भागें। इसके बाद उन्होंने कहा कि क्रोध की अवस्था में व्यक्ति की स्मृति नष्ट हो जाती है। नुकसान होने के बाद व्यक्ति समझ पाता है कि उसने क्या खोया। कहा कि भगवान की बाल लीलाएं बड़ी अटपटी हैं। इन लीलाओं का आनंद हृदय से लेना चाहिए। इस मौके पर सरिता माहेश्वरी, लता माहेश्वरी, शिवकुमार, दीपक माहेश्वरी, नरेंद्र गरल आदि मौजूद रहे। संवाद