बिल्सी। श्री माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने रामचरित मानस सुनने और इसमें बताए मार्ग का अनुसरण करने का महत्व बताया।
कथावाचक ने कहा कि जीवन के हर संशय का समाधान श्रीराम कथा करती है। रामचरित मानस में नौ दिन में नौ प्रश्न हैं। निर्गुण ब्रह्म सगुण कैसे हो गया, राम जन्म का कारण क्या है। प्रभु के बाल्यकाल की लीला, विवाह लीला, वनगमन लीला और राक्षसों के मारने का प्रयोजन सभी इसमें है। इन्हीं प्रश्नों के उत्तर नौ दिन में दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त के हृदय में भगवान आए तो आंसू आए बिना रह नहीं सकते। भगवान का सिमरन करते रहिए। इस मौके पर नरेंद्र गरल, चन्द्रपाल तोष्णीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, मनोज कुमार वार्ष्णेय, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, नीरज कुमार माहेश्वरी आदि मौजूद रहे। संवाद
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जब तक मनुष्य रामकथा नहीं सुनता तब तक मोह नहीं भागता
बिल्सी। श्री माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने रामचरित मानस सुनने और इसमें बताए मार्ग का अनुसरण करने का महत्व बताया।
कथावाचक ने कहा कि जीवन के हर संशय का समाधान श्रीराम कथा करती है। रामचरित मानस में नौ दिन में नौ प्रश्न हैं। निर्गुण ब्रह्म सगुण कैसे हो गया, राम जन्म का कारण क्या है। प्रभु के बाल्यकाल की लीला, विवाह लीला, वनगमन लीला और राक्षसों के मारने का प्रयोजन सभी इसमें है। इन्हीं प्रश्नों के उत्तर नौ दिन में दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त के हृदय में भगवान आए तो आंसू आए बिना रह नहीं सकते। भगवान का सिमरन करते रहिए। इस मौके पर नरेंद्र गरल, चन्द्रपाल तोष्णीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, मनोज कुमार वार्ष्णेय, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, नीरज कुमार माहेश्वरी आदि मौजूद रहे। संवाद