बदायूं। हिंदी बाल साहित्यकार डॉ. ममता नौगरिया को उप्र हिंदी संस्थान द्वारा अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें इससे पहले भी साहित्य क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि पर जिले का मान बढ़ा है।
कवि मैथिलीशरण गुप्त, सियाराम शरण गुप्त के परिवार से ताल्लुक रखने वाली ममता नौगरिया का जन्म मध्यप्रदेेश के जबलपुर में हुआ था। बचपन से ही उनको साहित्य और प्रकृति के प्रति रुचि थी। 1976 में झांसी के डॉ. एससी नौगरैया से उनकी शादी हुई। उसके बाद में परिवार समेत वह बदायूं चली आयी। तब से वह बदायूं में ही रह रही हैं।
शिक्षा ग्रहण करने के दौरान भी सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनके द्वारा प्रतिभाग किया जाता था, जिसकी वजह से उनको पूर्व राज्यपाल राम नाईक व संस्कृति मंत्री (केंद्र सरकार) डॉ. महेश शर्मा द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। लेखन के प्रति रुचि बचपन से होने की वजह से अब तक उनकी 75 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। उनका कहना है कि साहित्यिक व सामाजिक यात्रा में आगे बढ़ने में विशेष सहयोग उनके पति डॉ. एससी नौगरिया का रहा।
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ये मिल चुके हैं पुस्कार
डॉ. ममता को हिंदी शिरोमीण सम्मान बिजनौर, हिंदी श्रेष्ठ लेखन सम्मान बिजनौर, श्रेष्ठ साहित्य सम्मान पटना, साहित्य सृजन सम्मान भोपाल, श्रेष्ठ लेखन सम्मान देहरादून, साहित्य लेखन सम्मान लखनऊ, भारतीय साहित्य सम्मान बिजनौर, सहित्य सृजन सम्मान राजस्थान के अलावा हरदोई, अलीगढ, मेरठ, बदायूं, दतिया, गाजियाबाद, ग्वालियर, मुंबई, नेपाल, ईटावा, मैनपुरी समेत अन्य जगहों पर पुरस्कार मिल चुके हैं।
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ये किताबें हुई हैं प्रकाशित
महिला सशक्तीकरण, स्वच्छ पर्यावरण, योगी आदित्यनाथ: सबके साथ, ममता दादी की कहानियां, सब कुछ संभव है, मन की बात: नरेंद्र मोदी, कोरोना काल: लॉकडाउन समेत 75 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी है।