बदायूं। इस समय तमाम किसानों की धान की फसल खेतों में सड़ रही है। उन्होंने ज्यादा नुकसान से बचने को अपनी फसल उठाना शुरू कर दी है, लेकिन राजस्व विभाग ने अभी तक सर्वे शुरू नहीं किया है। इससे फसल के नुकसान का आंकलन बिगड़ने का अनुमान है।
प्रदेश सरकार ने पिछले सप्ताह तेज बारिश को देखते हुए किसानों को फसल के नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा की थी। इस बार जिले में ढाई लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल हुई, जिसमें एक लाख, चार हजार हेक्टेयर में बाजरा और 83 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई गई। अन्य में गन्ना, उड़द, तिल आदि की फसलें हुईं। तेज बारिश में सबसे ज्यादा धान की फसल को नुकसान पहुंचा। उस वक्त धान की फसल पककर तैयार खड़ी थी। जो फसल पक चुकी थी, वह खेतों में बिछ गई। उसमें पानी भर गया। कई दिन बारिश होने से खेतों में पानी नहीं सूखा। इन हालातों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया था।
कहा गया था कि जिन किसानों का 33 प्रतिशत से ऊपर नुकसान हुआ है। उन्हें 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन सर्वे शुरू न होने से किसान चिंतित हैं। बारिश थमने के बाद अब तक करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा किसान धान की फसल उठा चुके हैं। वह अपना खेत खाली कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राजस्व विभाग के सर्वे का आंकलन बिगड़ेगा, किस किसान का कितना नुकसान हुआ, इसकी अनुमान के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी जाएगी।
किसान बोले- राजस्व विभाग का ढीला रवैया
किसानों का कहना है कि फसल उठने के बाद अब मनमाने तरीके से क्षति का आंकलन होगा। मीरापुर के किसान अरविंद ने बताया कि धान की फसल गिरने से ज्यादा नुकसान हुआ है। उसे जल्द से जल्द उठाने की कोशिश चल रही है। किशनपुर के किसान वीरपाल सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग के कर्मचारी खेत में आकर सर्वे करें, तो सही आंकलन होगा। मकरंदपुर के किसान मोहर सिंह के मुताबिक इस समय धान की फसल तेजी से उठाई जा रही है। इंतजार करेंगे तो और नुकसान होगा।
मजदूरों ने बढ़ाई मजदूरी
इस समय किसानों के सामने कठिन परिस्थिति बनी हुई है। उन्हें धान की फसल उठाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूरों ने अपनी मजदूरी 300 से बढ़ाकर 400 या साढ़े चार रुपये कर दी है। चूंकि बारिश में धान की फसल गिर चुकी है। ऐसे में मजदूरों से काम कराना मजबूरी है।
इस बारिश में धान की फसल को कितना नुकसान पहुंचा है। अभी यह बताना मुश्किल है। राजस्व विभाग जब इसका सर्वे करेगा, तभी इसके बारे में जानकारी होगी। इस बार 83 हजार हेक्टेयर में धान की फसल हुई है। उसमें ही सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। -दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।