आरती के पेट में शुक्रवार दर्द उठा था, इस पर पति सुरेंद्र व परिवार के
अन्य लोग उसे बिल्सी के एक प्राइवेट अस्पताल ले गए थे। वहां रात भर भर्ती
रहने के बाद डॉक्टर ने आरती को खून की कमी बताई, मगर उसका इंतजाम बिल्सी
में नहीं था। ऐस में परिवार वाले उसे बरेली के लिए वैन से लेकर चल दिए,
एंबुलेंस का इंतजाम नहीं हो पाया था। दोपहर करीब 11 बजे जब वैन रामगंगा से
तीन किलोमीटर पहले कोहनी पर पहुंची तो पुलिस ने आगे जाम लगे होने की बात
कहकर रोक दिया। पहले से वहां काफी वाहन रोके हुए थे, सो कोहनी में भी जाम
लग गया था। आगे फंसी दो एंबुलेंस निकलवाए जाने का पता लगने पर परिवार वालों
ने आरती की स्थिति का हवाला देते हुए पुलिस से मिन्नतें कीं, मगर पुलिस
तैयार नहीं हुई। कहा गया कि यदि एंबुलेंस होती तो जाने देते। नतीजा यह हुआ
कि करीब तीन बजे आरती ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परेशानी यह हुई कि कैसे शव
को लेकर वापस जाएं। तब परिवार वालों ने मीडिया के लोगों तक बात पहुंचाई।
मामला गर्म होने के बाद पुलिस ने किसी तरह वैन निकलवाई और परिवार वाले शव
लेकर गांव चले गए। सुरेंद्र के चाचा श्याम सिंह का कहना है कि रविवार को वे
लोग बदायूं और बरेली के अधिकारियों से मिलकर एफआईआर की मांग रखेंगे, उसके
बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस मामले में एसओ भमोरा राकेश सिंह यादव
का कहना है कि रक्षाबंधन पर यातायात का दबाव होने की वजह से जाम लगा था।
इसमें किसी की मौत हुई है, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।