दो साल पहले हुए अपहरण की सीबीआई कर रही जांच
कई बड़े पुलिस अधिकारी भी हैं जांच की जद में
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली से दो साल पहले 31 जुलाई 2014 को लापता हुए उमेश यादव के मामले में सीबीआई की विशेष अपराध शाखा ने पड़ताल तेज कर दी गई। उमेश यादव के बारे में जानकारी देने वाले को दो लाख रुपये इनाम की घोषण की गई है। मामले में जांच सीबीआई की विशेष अपराध शाखा के डिप्टी एसपी वी दीक्षित कर रहे हैं। कई बड़े पुलिस अफसर भी जांच के दायरे में हैं।
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली निवासी उमेश यादव का गांव के ही मनफूल यादव से विवाद चल रहा था। कई साल पहले सिठौली के भूदेव और चंद्रपाल ने अपनी 52 बीघा जमीन बेची थी। इसमें 26 बीघा जमीन उमेश के पिता चंद्रपाल ने खरीद ली थी। मनफूल पूरी जमीन खरीदना चाहता था। मनफूल और चंद्रपाल पक्ष में इससे रंजिश शुरू हो गई। मनफूल का भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी है। रुपये का इंतजाम न होने पर मनफूल ने 26 बीघा जमीन अपने बहनोई चरन सिंह निर्माण के नाम करा दी। चरन सिंह निर्माण के दामाद योगेश यादव उस समय आईजी बरेली के स्टाफ अफसर थे। वर्तमान में वह एसपी के पद पर हैं। पुलिस में बड़े ओहदों पर बैठे नाते रिश्तेदारों की मदद से मनफूल ने पूरी 52 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया।
जमीन की रंजिश में वर्ष 2002 में हुए एक खूनी संघर्ष में मनफूल पक्ष के रघुवीर की मौत हो गई। हत्या के आरोप में निचली अदालत ने चंद्रपाल और उसके बेटे उमेश को उम्र कैद की सजा सुनाई। बाद में दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। चंद्रपाल का बेटा उमेश यादव 31 जुलाई 2014 को गायब हो गया। उमेश की मां सत्यवती ने थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। बाद में पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला अपहरण में तरमीम कर लिया।
विवेचना में मनफूल उसके बेटे अवधेश, विजय समेत गांव के ही मदन और लोचन के नाम प्रकाश में आए। इसी दौरान विवेचक का तबादला कर दिया गया। बाद में विवेचना बरेली के थाना भमोरा पुलिस को दी गई। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उमेश की मां सत्यवती गांव में अकेली रहती हैं। चंद्रपाल कई साल से मथुरा में अपने पुत्र गोपाल के साथ रह रहा है। विवेचना में तेजी आने से उमेश के परिवार वालों को उम्मीद जगी है।