कमिश्नर तक हुईं हैं शिकायतें, नगर पालिका भी दे चुकी लिखकर
जलस्रोत बचाने को शासन के प्रयास प्रशासनिक स्तर पर सहयोग न मिलने से गति नहीं पकड़ पा रहा है। जलस्रोतों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना तो दूर, उनके कब्जे तक नहीं हटाए जा रहे हैं। नगर पालिका के अंतर्गत दियोरिया तालाब को काफी समय से मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है। एसडीएम और पुलिस को नगर पालिका प्रशासन लिखित तौर पर शिकायत कर चुकी है फिर भी अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
कस्बे से सटे गनगोला गांव में रकबा संख्या 365 जिसमें करीब तीन बीघा तालाब ग्राम पंचायत का है। इस पूरे तालाब पर गांव के ही एक व्यक्ति ने कब्जा कर उसके चारों तरफ नींव भरवा ली है। गांव के ही महेश, बाबू खां आदि लोगों ने डीएम और कमिश्नर से शिकायत की, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। नींव भरने से एक पूरे मुहल्ले के पानी का निकास बाधित हो रहा है। इसी तरह क्षेत्र के गांव मेरी बजर मेरी और ढका दियौरारा आदि अनेक गांव में दो ढाई सौ बीघा के बड़े-बड़े तालाब हैं। छोटे रकबे के तो सैकड़ों तालाब हैं, जिन पर स्थायी और अस्थायी स्तर के कब्जे हैं। इन्हें कब्जा मुक्त कराने का अभी तक प्रयास नहीं हुआ है।
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एक वर्ष को दिया जाता है मछली पालन को पट्टा
दातागंज। शासन की नीति के मुताबिक तालाब का पट्टा 10 हजार रुपये प्रबित हेक्टेयर (एक वर्ष) को दिया जाता है। पट्टा मछली पालान के नाम पर लिया जाता है, लेकिन उसका उपयोग खेती के लिए होता है यदि खेती को पेशगी पर जमीन ली जाए तो न्यूनतम 25-30 हजार रुपये देने पड़ेंगे।
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क्षेत्र के तालाब चिह्नित कराए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा खोदाई कराकर इन्हें गहरा किया जा रहा है। गहराई होने से तालाब खेती लायक नहीं रहेंगे और जल भी अधिक संरक्षित होगा। जहां कब्जे हो रहे हैं, उनको मुक्त कराया जाएगा।
-ओपी तिवारी, एसडीएम दातागंज