बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव बीधा नगला में सुरेंद्र नाम के युवक ने रविवार सुबह खुद को आग लगा ली। परिवार वाले उसे जिला अस्पताल लाए। हालत गंभीर होने पर उसे बरेली रेफर कर दिया गया, लेकिन परिवार वालों के पास इतने रुपये नहीं थे कि वह उसका इलाज करा पाते। वह उसे अस्पताल से घर ले आए। यहां शाम को सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया। जवान बेटे की मौत के बाद उसकी बुजुर्ग मां पार्वती का रो-रो कर बुरा हाल है। परिवार वालों ने बिना पोस्टमार्टम और पुलिस को खबर दिए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
बीधा नगला निवासी सुरेंद्र कोरी(24) पुत्र वेदराम मेहनत मजदूरी करता था। सुरेंद्र पांच भाई थे। सुरेंद्र के पिता और सबसे बड़े भाई बाबूराम की मौत हो चुकी है। बाबूराम की पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा है। सुरेंद्र के बड़े भाई कन्हई, राजवीर और गजेंद्र की भी शादी हो चुकी है। यह सभी अपने-अपने परिवारों के साथ अलग रहते हैं। सभी भाई मेहनत-मजदूरी करते परिवार पालते हैं। इनके पास सिर्फ साढ़े तीन बीघा जमीन है। सुरेंद्र अविवाहित था और अपनी बूढ़ी मां पार्वती के साथ रहता था।
लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते सुरेंद्र कई दिनों से परेशान चल रहा था। कुछ दिनों से उसे मजदूरी भी नहीं मिली थी। रविवार सुबह सुरेंद्र ने खुद को घर की कोठरी में बंद करके आग लगा ली। परिवार वाले उसे गंभीर हालत में लेकर बदायूं आए। यहां से सुरेंद्र को बरेली रेफर किया गया, लेकिन परिवार वाले उसे बरेली नहीं ले जा सके। गंभीर हालत में सुरेंद्र को घर ले आए। यहां उसकी मौत हो गई।
विधवा भाभी का बना है जॉबकार्ड
दबतोरी। मनरेगा के अंतर्गत जॉब कार्ड भी बनाए जाते हैं। इस परिवार से सुरेंद्र की विधवा भाभी का कार्ड बना था। उन्हें गांव में मजदूरी मिल जाती थी। सुरेंद्र भी मां और भाभी की हेल्प करता था। प्रधान सुनील यादव का कहना है कि वह अभी प्रधान निर्वाचित हुए हैं। इसलिए गांव में किन-किन को मनरेगा के तहत काम मिल रहा है, पूरी तरह जानकारी नहीं है। सुरेंद्र के परिवार को जो संभव मदद होगी दिलाई जाएगी।
जिला अस्पताल बना रेफर सेंटर
बदायूं। मोटा बजट खर्च होने के बाद भी जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा। ज्यादातर घायलों को यहां से बरेली रेफर कर दिया जाता है। तमाम की तो रास्ते में ही मौत हो जाती है। हालांकि अस्पताल में वर्न वार्ड के साथ पर्याप्त तादाद में दवाएं भी हैं, इसके बावजूद डॉक्टर यहां झुलसे मरीजों का इलाज करना जरूरी नहीं समझते। वह इसे बला समझकर टालने की कोशिश करते दिखते हैं। इसीलिए यहां आने वाले मरीज को तत्काल रेफर का कागज थमा दिया जाता है। इस संबंध में एसडीएम गुलाब चंद्र ने कहा कि तहसील प्रशासन को कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर आर्थिक तंगी के चलते आत्मदाह का मामला है, तो संबंधित लेखपाल से इसकी जांच कराने के बाद जो भी जरूरी होगा कार्रवाई की जाएगी।