पत्नी से कहासुनी होने पर घर से नाराज होकर निकले युवक रमेश की लाश तहसील तिराहे के पास एक खेत में मिली। उसकी गला दबाकर हत्या करने के बाद शव यहां लाकर फेंका गया। इसकी तस्दीक पोस्टमार्टम रिपोर्ट कर रही है, जिसमें मौत की वजह गला दबाया जाना दर्शाया गया है। परिवार वाले किसी भी रंजिश से इंकार कर रहे हैं। पुलिस ने अभी हत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
गुरुवार सुबह लोग घूमने को निकले तो उन्होंने आसफपुर रोड स्थित तहसील तिराहे से करीब 50-60 मीटर दूरी पर एक खेत में युवक की लाश पड़ी देखी। सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंच गई। कुछ देर बाद युवक की पहचान कांशीराम कॉलोनी निवासी रमेश 30 पुत्र लटूरी के रूप में हुई। सूचना मिलते ही मृतक के परिवार वाले भी आ गए। परिवार वालों ने बताया बुधवार की रात रमेश की अपनी पत्नी लक्ष्मी से कहासुनी हो गई थी। वह पत्नी से नाराज होकर अपने पैतृक घर मोहल्ला गदरपुरा के लिए जाने की कहकर निकल आया। पत्नी लक्ष्मी को पूरी बात मालूम थी, इसलिए किसी ने रात को उसे तलाशा भी नहीं। शव मिलने पर परिवार को घटना की जानकारी हुई।
पुलिस ने दोपहर में पंचनामा भरने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पत्नी लक्ष्मी ने किसी से रंजिश होने से इंकार किया है। उसने तहरीर में ननद से बात करने पर घर से नाराज होकर जाने का ही जिक्र किया है। तहरीर में हत्या की आशंका भी नहीं जताई गई है। सिर्फ ये दर्शाया गया है कि पति नाराज होकर घर से चले गए। बाद में उसे सूचना मिली कि उनका शव खेत में पड़ा मिला है, लिहाजा जांच कर कार्रवाई की जाए।
सिर्फ मुंह पर चोट के निशान मिले हैं। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। परिवार वाले किसी से भी रंजिश होने से इंकार कर रहे हैं। पत्नी ने भी हत्या की आशंका नहीं जताई है। फिर भी तफ्तीश की जा रही है, जो भी होगा, जल्द सामने आ जाएगा।
-कश्मीर सिंह, कोतवाल, थाना बिसौली।
चार बच्चों का कैसे होगा भरण-पोषण
रमेश के पास न तो एक बीघा जमीन है और न ही आय के अन्य साधन। वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसके तीन पुत्रियां और एक पुत्र है। छोटी बेटी गुड़िया तीन साल की है। पत्नी लक्ष्मी का रो-रोकर बुरा हाल है, वह बार-बार यही कह रही थी कि अब इन मासूमों को कौन पालेगा।
चंद साल में चार भाइयों की हो गई मौत
बिसौली। वक्त की मार ने पूरा परिवार उजाड़ दिया। चंद साल में ही चार भाइयों की मौत हो गई। रमेश की मौत के बाद अब पूरे परिवार में सिर्फ लालू ही बचा है। मोहल्ला गदरपुरा में लटूरी का परिवार रहता था। दस साल पहले उनके पुत्र मदन की मौत हो गई थी। इसके बाद तो लटूरी के परिवार पर मानों मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। दो साल पहले उनके बेटे नेमचंद्र और पिछली साल गुड्डू की मौत हो गई। लटूरी भी अक्तूूबर 2014 में चल बसे। अब रमेश की मौत के बाद पांच भाइयों में सिर्फ लालू ही बचे हैं, जो दिल्ली में रहकर अपना परिवार पालते हैं।