सीमावर्ती करेंगी रेलवे स्टेशन पिछले 13 सालों में 10 लोगों की जान जा चुकी है। सभी की मौत ट्रेन से कटकर हुई थी। स्टेशन पर हादसों का क्रम 2002 से शुरू हुआ। इस वर्ष गांव करेंगी निवासी मुरारीलाल की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इस प्लेटफार्म पर 2003 में गांव गरैरा निवासी मनवीर सिंह ट्रेन की चपेट में आकर जान गवां बैठे। घटना उस समय हुई जब वे रिश्तेदारी से लौटकर गांव आ रहे थे। इसी साल करेंगी के गुड्डू भी ट्रेन की चपेट में आ गए। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका 2004 में गांव पपगांव की देवरानी और जेठानी की भी ट्रेन से कटकर मौत हुई थी। उस वक्त दो महिलाओं की मौत का कारण रेलवे स्टेशन पर लाइट का न होना बताया गया था। इतने पर भी जब रेलवे प्रशासन नही चेता।
2014 में गांव महमूदपुर, बरेली के राजीव की कटकर मौत हो गई। इसी साल 17 फरवरी को कस्बा आंवला निवासी सनी चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। अब बुधवार को इसी प्लेटफार्म पर स्टेशन मास्टर पंकज सिन्हा की भी ट्रेन से कटकर मौत हो गई। लगातार हो रहे हादसों से आसपास के लोग भयभीत हैं। लोग तरह-तरह के अंधविश्वास की बातें भी करने लगे हैं।