इंजीनियर दंपत्ति हत्याकांड:
इंजीनियर दंपति के परिवार वालों से हो चुकी है पूछताछ
जांच एजेंसी डॉक्टरों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर करेगी चर्चा
रिटायर्ड इंजीनियर दंपति हत्याकांड में जांच कर रही सीबीआई अब डॉक्टरों से पूछताछ करेगी। इस बारे में जांच एजेंसी ने दंपति का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल के तीन डॉक्टरों को कॉल किया है। सीबीआई मामले में गुप्ता दंपति के दोनों पुत्रों और पुत्रवधु से पूछताछ के साथ घटनास्थल का नक्शा बना चुकी है। जांच एजेंसी की एक टीम बदायूं में ठहरी हुई है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी विजेंद्र गुप्ता के छोटे बेटे मुकुल गुप्ता को 30 जून 2007 को पुलिस ने बरेली में एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था। विजेंद्र गुप्ता अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए जोरशोर से पैरवी कर रहे थे। मुकुल के हत्यारों में आईपीएस अफसर जे रविंद्र गौड़ का नाम भी शामिल था। रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सन्नो गुप्ता के शव आठ अप्रैल 2015 को उनकी रसोई में मिले थे। पुलिस जांच में कोई ठोस क्लू तलाश नहीं कर सकी, तो शासन ने मामले में जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
हाल ही में सीबीआई की चार सदस्यों की एक टीम बदायूं पहुंची थी। 14 और 15 सितंबर को जांच टीम ने मौका मुआयना कर घटनास्थल का नक्शा बनाया। इसके बाद विजेंद्र गुप्ता के बड़े पुत्र शेखर गुप्ता और छोटे बेटे हेमंत गुप्ता से पूछताछ की। दोनों शव का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राजेश वर्मा के साथ सर्जन डॉ. अवधेश कुमार और डॉ. अंकित गुप्ता शामिल थे। सीबीआई ने तीनों डॉक्टर को पूछताछ के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुलाया है। डॉक्टरों से सोमवार को पूछताछ हो सकती है।
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मुकुल कांड के आरोपी भी हैं रडार पर
बदायूं। रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता के बेटे मुकुल गुप्ता को फर्जी मुठभेड़ में मारने के आरोपियों में आईपीएस अफसर जे रविंद्र गौड़ (तत्कालीन एएसपी बरेली), विकास सक्सेना (तत्कालीन एसओ, सीबीगंज बरेली), एसआई मूला सिंह, देवेंद्र सिंह, आरके गुप्ता, कांस्टेबल गौरी शंकर, दिनेश चंद्र, अनिल कुमार, रवि प्रकाश, वीरेंद्र शर्मा और कालीचरन (अब मृत) शामिल हैं। जे रविंद्र गौड़ का चार्जशीट में नाम नहीं था। बाकी के खिलाफ केस चल रहा है। विजेंद्र गुप्ता जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ भी केच चलाने के लिए हाईकोर्ट में लड़ रहे थे। ऐसे में मुकुल गुप्ता फर्जी एनकाउंटर कांड के आरोपी भी जांच एजेंसी के रडार पर होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता।