गांव के लोग भी इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर कुसुम और राजेंद्र ने घरेलू विवाद में आत्मघाती कदम क्यों उठा लिया। दोनों की शादी को अभी डेढ़ साल भी पूरा नहीं हुआ है।
राजेंद्र के पिता पुन्नी लाल गांव सुसरका सुरैरा के छोटे किसान हैं। परिवार में राजेंद्र ही सबसे बड़े हैं। राजेंद्र की खेतीबाड़ी देखते हैं। इससे परिवार चलता है। पड़ोसियों की मानें तो डेढ़ साल में उन्होंने कभी नहीं सुना कि राजेंद्र और कुसुम के बीच कोई झगड़ा हुआ हो। इसी गांव में कुसुम की बहन पूनम ब्याही हैं। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। कुसुम ने कभी ससुराल की कोई शिकायत अपने बहन से भी नहीं की। लोगों के जेहन में सवाल है कि जब कुसुम और राजेंद्र का दंपति जीवन ठीक चल रहा था तो ऐसी कौन सी बात हुई कि दोनों ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इसमें कुसुम की मौत हो गई।