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किसी के बेटे की शादी टली, कोई इलाज को तरसा

Sat, 05 Aug 2017 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  बदायूं।
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शुगर म‌िल - फोटो : अमर उजाला
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अपनी ही रकम पाने को इधर-उधर भटक रहे गन्ना किसान 
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तीन चीनी मिलों पर जिले के 7435 किसानों का भुगतान बकाया 
मूसाझाग इलाके के रायपुर गांव निवासी भूपसिंह और उनके परिवार का रोजगार के नाम पर एक मात्र सहारा खेती है। उन्होंने राणा शुगर मिल को अपना गन्ना बेचा था। इसके बाद अप्रैल में बेटे की शादी तय कर दी। सोचा था कि गन्ने का भुगतान मिल जाएगा, जिससे शादी का खर्चा कर लेंगे। मगर चीनी मिल ने अभी तक भुगतान नहीं किया। इससे भूपसिंह को बेटे की शादी टालनी पड़ी। कुंवरगांव इलाके के दुगरैया गांव निवासी अली जीलानी गंभीर रूप से बीमार हैं। घर में जो था सब इलाज में लगा दिया। उनके बेटे मोहम्मद ग्यास गन्ने का भुगतान कराने को चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका दर्द समझाने वाला कोई नहीं। यही नहीं जिले के 7435 किसानों का तीन चीनी मिलों पर 32.71 करोड़ रुपया फंस गया है। भुगतान न मिलने किसी की बेटी की शादी टल गई, कोई खेती में लागत नहीं लगा सका, किसी के बच्चे की स्कूल फीस जमा नहीं हुई। परेशान गन्ना किसान भुगतान के लिए किसान चीनी मिलों और गन्ना सहकारी संघ के चक्कर लगा रहे हैं।  
सहकारी गन्ना संघ के जरिए जिले के किसान निजी क्षेत्र की पांच और सहकारी क्षेत्र की एक मिल को गन्ना देते हैं। बदहाल हो चुकी शेखूपुर सहकारी चीनी मिल ने किसानों को अब तक 16.38 करोड़ 87 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया है। इसी तरह निजी क्षेत्र की बिसौली स्थित यदु शुगर मिल पर भी जिले के गन्ना किसानों का 13.38 करोड़ 21 हजार और करीमगंज स्थित राणा शुगर मिल पर 2.54 करोड़ 32 हजार रुपया फंसा है। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों का भरोसा दिया था कि मिलों से उनका शत-प्रतिशत भुगतान 25 अप्रैल तक हर हालत में करा दिया जाएगा। मगर चीनी मिलों की मनमानी के आगे मुख्यमंत्री की घोषणा भी हवाई साबित हुई। 
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किसानों की बात 
मजबूरी में टालनी पड़ी बेटे की शादी 
किसान को अपनी फसल से ही उम्मीद होती है। इतना नहीं पता था कि मिल इस तरह से गन्ने का भुगतान रोक लेगीं। अप्रैल में बेटे की शादी थी। राणा शुगर मिल से भुगतान न मिलने की वजह से शादी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। कृषि कार्य भी प्रभावित है।-भूप सिंह, किसान 
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आगे की फसल भी चौपट  
चीनी मिलें बंद हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं। अब तक मिल से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। कई बार अधिकारियों से संपर्क किया। पूरा परिवार कृषि पर ही निर्भर है। गन्ने का भुगतान न होने से आगे की फसल भी चौपट हो गई। -गिरीश पटेल, किसान 
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नहीं करा पा रहे पिता का इलाज 
चीनी मिल पर गन्ने का बकाया करीब 45 हजार रुपया फंसा है। पिता अली जीलानी बीमार हैं। परिवार की आमदनी का जरिया केवल खेती है। गन्ने का भुगतान न होने से पिता का इलाज नहीं हो पा रहा है। -ग्यास मोहम्मद, किसान 
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सरकार ने किसानों से किया छलावा 
सरकार किसानों के साथ छलावा करती है। पहले गन्ने का किसानों का भुगतान रोक लिया गया और बाद में गेहूं खरीद के दौरान किसान को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ा। किसान को फसल की समय से और सही कीमत मिले तो स्थिति में सुधार होगा।-।-उदय प्रताप, किसान
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गन्ना मूल्य पर रंगराजन फार्मूला स्वीकार नहीं 
गन्ना मूल्य पर प्रदेश सरकार रंगराजन फार्मूला लागू करना चाहती है। यह बिल्कुल स्वीकार नहीं होगा। प्रदेश सरकार चीनी मिलों से किसानों के बकाया का भुगतान कराने में नाकाम रही है। यह किसानों के साथ वादाखिलाफी है। कर्ज माफी योजना में भी प्रदेश के 80 प्रतिशत किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ है।-जलज यादव, किसान नेता 
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जिन चीनी मिलों पर किसानों का बकाया है उनको नोटिस दिया गया है। अगर मिलें जल्द भुगतान नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी। सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल ने भुगतान के लिए सरकार से बजट की मांग की है। -राम किशन, सचिव सहकारी गन्ना संघ
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