विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अहमद उल्ला खां ने चर्चित उझानी कांड के आरोपी सिपाही गौरव टाइटलर की जमानत खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी कांस्टेबल है और उसने अपने पद का दुरुपयोग किया है।
बताते चलें कि घटना बीती 15 जनवरी की है। पीड़ित किशोरी की मां ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसने कहा कि उसके देवरों ने उसकी पुत्री को ट्यूशन जाते समय कार से जान से मारने की नीयत से कुचलना चाहा। पीड़ित किशोरी को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। होश आने पर उसने थाना उझानी में तैनात सिपाही पर छेड़छाड़ कर जान से मारने की नीयत से थाना परिसर के अपने आवास की छत से धक्का देना बताया। पीड़िता के 164 के बयान न्यायालय के सामने दर्ज हुए थे। आरोपी ने अपनी प्रथम जमानत अर्जी चार फरवरी को कोर्ट में लगाई थी। जिसे पूर्व न्यायाधीश ने 25 फरवरी को निरस्त कर दिया था। आरोपी के विरुद्ध सात अप्रैल को आरोप पत्र दाखिल होने के बाद उसके अधिवक्ता ने दूसरा जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट के सामने पेश किया और उसमे यह कहा गया कि घटना वाले दिन आरोपी न्यायालय परिसर में मौजूद था। घटना में उसका कोई हाथ नहीं था। अभियोजन पक्ष के एडीजीसी राजीव यादव ने कहा कि पीड़ित किशोरी के गंभीर चोटें आई हैं। नाबालिग किशोरी के साथ छेड़छाड़ करने व जान से मारने की नीयत से थाना परिसर में अपने आवास की छत से फेंकने एवं एक पुलिस कांस्टेबल द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए आरोपी गौरव टाइटलर की जमानत अर्जी खारिज कर दी।