एक बालक का नहीं लगा पता, तलाश जारी
कछला और सहसवान के सुजावली गंगा घाट पर हुईं घटनाएं
मरने वालों में दोनों किशोर उझानी के निवासी
गंगा स्नान करते वक्त कछला और सहसवान में छह लोग बह गए। इनमें कछला गंगा घाट पर चार किशोरों में से दो को एक नाविक ने बचा लिया। दो की मौत हो गई। दोनों के शव मिल है। इधर, सहसवान में सुजावली गंगाघाट पर एक किशोरी और एक बालक गंगा में बह गए। किशोरी को तो बचा लिया गया, लेकिन बालक देर शाम तक नहीं मिल सका था। उसकी तलाश की जा रही है। उझानी। नगर के मोहल्ला गौतमपुरी निवासी सुरजीत (15) पुत्र सुशील कुमार, शेखर (16) पुत्र अरुण कुमार, साहूकारा के चिंटू (17) पुत्र विपिन और बादल (14) पुत्र दिनेश कुमार भदौरिया जागरण पार्टी में काम करते हैं। सोमवार को यह लोग कासगंज में दुर्गा जागरण करने गए थे। मंगलवार को चारो वहां से वापस आए, तो कछला में गंगा स्नान के लिए रुक गए। गंगा स्नान करते वक्त नए पुल के पिलर नंबर चार के पास गहराई में जाने से चारो डूबने लगे। एक नाव वाले ने किसी तरह से चिंटू और बादल को सुरक्षित निकाल लिया। सुरजीत और शेखर का पता नहीं लगा। बाद में गोताखोरों ने सुरजीत और शेखर के शव गंगा से निकाले।
खबर मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। दोनों शव चिंटू और बादल के साथ उझानी सीएचसी लाए गए। यहां सुरजीत और शेखर के परिवार वालों ने काफी हंगामा किया। चिंटू के साथ मारपीट भी कर दी। बाद में पुलिस ने किसी तरह से मामले को संभाला। दोनों शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।
सहसवान। गंगा में डूबने की दूसरी घटना सहसवान में सुजावली घाट पर हुई। सुजावली गांव के ही खुशीराम के बेटे श्रीकृष्ण का मंगलवार को मुंडन संस्कार था। परिवार के लोगों के साथ गांव के लोग भी मुंडन संस्कार में शामिल होने सुजावली गंगा घाट पर गए थे। गंगा स्नान करते वक्त नरेश की 13 वर्षीय बेटी पुष्पा और चरन सिंह का आठ वर्षीय पुत्र सत्यवीर गंगा में बह गए। इनको डूबता देखकर किसी तरह से लोगों ने पुष्पा को तो निकाल लिया, लेकिन सत्यवीर नहीं मिला। देर शाम तक गोताखोर उसे तलाश रहे थे।
सावधान! खूनी है नए पुल का पिलर नंबर चार
कछला गंगा घाट पर पिलर नंबर चार खूनी साबित हो रहा है। एक साल में इस पिलर के पास डूबने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि खूनी पिलर के पास कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया है। ऐसे में अक्सर यहां हादसे होते रहते हैं।
कछला गंगाघाट पर रेल और सड़क दो नए पुल बन चुके हैं। दो पुलों के निर्माण के बाद गंगा में कई जगह पर बड़े-बड़े गड्डे हो गए हैं। सड़क पुल का पिलर नंबर चार गंगा के बाहर है। ज्यादातर लोग इस पिलर से आगे नहीं बढ़ते। पिलर के पास कोई संकेतक न होने की वजह से लोग यहां हादसे का शिकार होते हैं। पिछले साल सोमवती अमावस्या पर इसी पिलर के पास मथुरा, भरतपुर और राजस्थान के नौ श्रद्वालुओं की इसी पिलर के पास डूबने से मौत हो गई थी। गौर करें तो एक साल में यह पिलर 15 लोगों की जान ले चुका है। इसके बावजूद बाढ़ खंड या नगर पंचायत की ओर से पिलर के पास कोई संकेतक नहीं लगाया गया है।