जानलेवा हमले के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ डॉ कपिला राघव ने पिता-पुत्र सहित चार को मुजरिम करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर आठ-आठ हजार का अर्थ दंड भी लगाया है।
करीब साढ़े तीन साल पहले थाना वजीरगंज गांव जुल्हेपुरा में यह घटना घटी थी। गांव निवासी वादी करन सिंह पुत्र लखपत सिंह ने 10 अक्तूूबर 2014 को रिपोर्ट लिखाई थी। वादी के अनुसार घटना वाले दिन उसके गांव में रामसिंह की मां की तेरहवीं थी। गांव के सभी लोगों की दावत थी। उसमें उसका पुत्र जयवीर भी शामिल था। उसके पुत्र की कहासुनी गांव के ही गौरी पुत्र रामस्वरूप से हो गई थी। जिसकी वजह से उसका पुत्र जयवीर घर वापस आ गया। वादी करन सिंह अपने परिवार के साथ अपनी छत पर बैठा था। तभी गौरी अपने पुत्र योगेंद्र, भाई नरसिंह, गांव के कुवंरपाल पुत्र रघुवीर के साथ लाठी और असलहा लेकर आ गया और गाली गलौज शुरू कर दी। उसके मना करने पर नाराज होकर सभी मुजरिमों ने मारपीट और जान से मारने की नीयत से फायर किया। जिससे वादी, उसकी पत्नी तारावती और पुत्री उर्वेश गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने गौरी, योगेंद्र, नरसिंह और कुंवर पाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और विवेचना करने के बाद कोर्ट में सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अपर सत्र न्यायाधीश डॉ कपिला राघव ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद गौरी, योगेंद्र, नरसिंह और कुंवरपाल को सात-सात साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई। साथ ही चारों मुजरिमों पर आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना जमा होने पर आधी धनराशि वादी पक्ष को भी देने का आदेश किया है।