पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने के आरोपी पति को सीजेएम कोर्ट ने पांच साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के इस फैसले को लेकर दिन भर चर्चा होती रही।
सीजेएम मोहम्मद असलम सिद्दीकी ने अभियोजन पक्ष की परिवादिनी सुशीला पुत्री चंद्रपाल निवासी गांव गढ़िया थाना गुन्नौर और आरोपी गुन्नौर थाना के गांव दिल्लीपुर के विजय के पक्ष की सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि विजय की शादी सुशीला के साथ वर्ष 1998 में हुई थी। कुछ दिनों के बाद सुशीला को ससुरालवालों ने कम दहेज को लेकर घर से निकाल दिया था। सुशीला को एक बेटा हुआ था।
पांच दिसंबर 2010 को वह अपने पिता के साथ गंगा स्नान के लिए राजघाट गई थी, जहां पर उसने पति विजय को दूसरी महिला के साथ देखा, तो उन दोनों की बहस भी हो गई थी। इस पर पति ने कहा था कि उसने दूसरी शादी कर ली है और उसे नहीं रखेगा। सुशीला ने 20 दिसंबर 2010 को मुंसिफ गुन्नौर में परिवाद दर्ज कराया था, जिस पर फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने यह कहते हुए सजा सुनाई कि दूसरी शादी करने से पहली पत्नी और बच्चे की जीवन नरक हो गया है। अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है कि समाज में उसकी पत्नी की स्थिति नारकीय हो गई है।