धंधेबाजों ने ग्रामीणों के सहारे खोजा फार्मूला, डनलप से पहुंचती खेप
बालू के खनन पर लगे प्रतिबंध के बाद भी धंधेबाजों ने काला कारोबार करने के लिए अजीब फार्मूला खोज लिया है। सुबह से ही शहर-कसबों तक रेता की खेप पहुंचने लगती हैं। धंधेबाजों के चंगुल में फंसे ग्रामीणों को कड़ाके की ठंड की परवाह नहीं है। प्रति डनलप चार-पांच सौ रुपया मुनाफा कमाने वाले ग्रामीणों पर न तो पुलिस की नजर पड़ती और न ही प्रशासनिक स्तर से रेत के काले कारोबार पर अंकुश लगाने की जरूरत महसूस की गई।
कछला से रेत के काले कारोबार की शुरूआत उसी दौरान से हो गई जब बाढ़ के बाद गंगा के जलस्तर में गिरावट आई। गंगाघाट और उसके आसपास इलाके में अवैध प्वाइंट बनाकर बालू का खनन तड़के पांच बजे से शुरू कर दिया जाता है। लोगों की नजर नहीं पड़े, इसीलिए धंधेबाज बालू भरे डनलप और बुग्गियों को ग्रामीणों के जरिए गंतव्य की ओर रवाना कर देते हैं। धंधेबाजों ने डनलप-बुग्गी स्वामी ग्रामीणों से अपना रेट फिक्स कर रखा है। मार्केट में प्रति डनलप बालू का रेट भले ही सात से नौ सौ रुपया है लेकिन उन्हें धंधेबाजों को हिस्सा देने के बाद चार-पांच सौ रुपया प्रति खेप से ज्यादा नहीं मिल पाते। पिछले दिनों अवैध खनन की शिकायत भारतीय किसान यूनियन के नगर अध्यक्ष चंद्रमोहन वर्मा ने तहसील स्तर पर की भी लेकिन राजस्व कर्मियों समेत पुलिस ने खनन के काले कारोबार पर गौर करने की जरुरत महसूस नहीं की।
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सहसवान और बदायूं में पकड़ी गईं थी रेत भरी ट्रालियां
उझानी। दो सप्ताह पहले सहसवान और बदायूं में पुलिस ने रेता भरी ट्रॉलियों को पकड़ा था। ट्रैक्टर ड्राइवरों से पूछताछ भी की गई लेकिन उन्होंने बिल्डिंग मैटेरियल की दुकानों का पुराना स्टॉक से बताकर पल्लू झाड़ लिया था लेकिन किसी ने भी हकीकत पर गौर नहीं किया। जबकि ट्रैक्टर-टॉलियों में कछला गंगाघाट की वजाय ननाखेड़ा, सरौता, हुसैनपुर खेड़ा और कादरचौक क्षेत्र से सटी गंगा की तलहटी से रेता लोड किया जाता है।
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खनन करके डनलप-बुग्गियों से रेता बाजार में पहुंचाए जाने की उन्हें सूचना नहीं है। किसी ने शिकायत भी नहीं की है लेकिन सच्चाई का पता लगाकर धंधेबाजों पर शिकंजा कसा जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
- जंगबहादुर यादव, एसडीएम सदर।